Monday, September 28, 2026
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Orchha Ram Raja Temple Scam: ओरछा रामराजा मंदिर घोटाला: 9 साल बाद हाईकोर्ट ने रद्द की FIR, जांच पर उठे सवाल

Orchha Ram Raja Temple Scam:
Orchha Ram Raja Temple Scam:

Orchha Ram Raja Temple Scam: निवाडी/देवेश गुप्ता: मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड की दूसरी अयोध्या कहे जाने वाली निवाड़ी जिले की रामराजा सरकार की नगरी ओरछा में आज से करीब 9 वर्ष पूर्व तत्कालीन मंदिर के लिपिक मुन्ना लाल तिवारी पर मंदिर में दान की गई धनराशि व आभूषणों को लेकर अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे थे, लेकिन शासन प्रशासन स्तर पर मंदिर की धनराशि व चढ़ावे को लेकर वित्तीय अनियमितताओं की जांच 9 वर्षो में भी पूरी नहीं हो सकी, नतीजतन मध्य प्रदेश हाइकोर्ट जबलपुर में लगी याचिका पर फैसला देते हुए माननीय न्यायालय ने तत्कालीन लिपिक मुन्ना लाल तिवारी पर दर्ज एफआईआर ही रद्द कर दी है, इस पूरे मामले में तत्कालीन तहसीलदार गुलाब सिंह बघेल की भूमिका पर सवाल खड़े किये गए थे।

Orchha Ram Raja Temple Scam: दरअसल यह पूरा मामला उस समय का है जब निवाड़ी जिला नहीं बना था और ओरछा टीकमगढ़ जिले की तहसील थी, उस दौरान साल 2017 में अविभाजित टीकमगढ़ जिले में रामराजा मंदिर के दान व चढ़ावे में हेराफेरी करने को लेकर तत्कालीन टीकमगढ़ कलेक्टर प्रियंका दास को शिकायत की गई थी, जिस पर कलेक्टर ने तत्कालीन एसडीएम जतारा आदित्य सिंह को जांच करने के निर्देश दिए थे.

 

Orchha Ram Raja Temple Scam: जिस पर जांच कर 16 बिंदुओं का जांच प्रतिवेदन एसडीएम ने कलेक्टर को सौपा था, जिसमें गंभीर वित्तीय अनियमितताओं को पाया गया था और तत्कालीन तहसीलदार गुलाब सिंह बघेल की भूमिका पर सवाल जांच रिपोर्ट में खड़े किए गए थे, जांच उपरांत रिपोर्ट पर कार्यवाही करते हुए कलेक्टर टीकमगढ़ ने मुन्ना लाल तिवारी की सेवाएं समाप्त कर उनके विरुद्ध ओरछा थाने में एफआईआर दर्ज कराने के आदेश जारी किए थे, जिसके बाद ओरछा थाने में 10 सितंबर 2017 को आईपीसी की धारा 409,420,425,426,467,468,471,493, और 497 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी.

 

Orchha Ram Raja Temple Scam: इस मामले में याचिकाकर्ता का कहना था की वह केवल मंदिर का लिपिकीय कार्य करता था, मंदिर के वित्तीय और प्रशासनिक निर्णय तहसीलदार एव वरिष्ठ राजस्व विभाग के अधिकारियों के द्वारा लिए जाते थे, और उनके खिलाफ गबन, धोखाधड़ी व जालसाजी का कोई सबूत जांच में नहीं पाया गया है, वही 2019 में लोकायुक्त संगठन मध्य प्रदेश ने भी इस मामले में जांच उपरांत जो रिपोर्ट शासन को सौपी थी, उसमें भी उन पर लगें आरोप निराधार पाए गए थे, इस पूरे मामले में देखा जाए तो शासन एवं प्रशासन स्तर पर जिम्मेदार अधिकारियों को जांच में बचाते हुए एक मामुली लिपिक को बलि का बकरा बनाया गया था.

 

Orchha Ram Raja Temple Scam: वजह ओरछा रामराजा मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधन व अध्यक्ष की जिम्मेदारी जिला कलेक्टर की होती है वही यहां का प्रमुख होता है, वही इस पूरे मामले में शिकायतकर्ता रामनरेश दास का आरोप है की प्रशासन व पुलिस ने इस पूरे मामले में शुरू से लीपापोती करते हुए जांच को भटकाने का प्रयास किया और तत्कालीन एसपी डॉ. राय सिंह नरवरिया ने समय से और ठीक से इस मामले में जांच ना करते हुए हाइकोर्ट को दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए, जिससे एफआईआर रद्द हो गई, वही न्यायालय के फैसले के बाद इस मामले में जिले के एसपी डॉ. राय सिंह नरवरिया व जिले की कलेक्टर व मंदिर प्रबंधन अध्यक्ष रामराजा मंदिर जमुना भिड़े कैमरे पर कुछ भी बोलने से बचती नजर आई है।

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