Friday, September 25, 2026
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चंद पैसो के चलते अस्पताल ने 5 दिन तक आदिवासी प्रसूता को रखा बंधक! जानें कैसे सुरक्षित घर लौटे जच्चा-बच्चा

निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : छत्तीसगढ़ की सीमा के पास भुंजिया जनजाति की 23 वर्षीय गर्भवती महिला नवीना चींदा को ओडिशा के धर्मगढ़ स्थित एक निजी अस्पताल में सामान्य प्रसव के बाद कथित तौर पर बंधक बनाकर रखा गया। अस्पताल ने नॉर्मल डिलीवरी के एवज में 20 हजार रुपए की मांग की। जब तक महिला की सास दोषो बाई पैसे जुटातीं, तब तक महिला और नवजात को अस्पताल में रोक रखा गया।

जच्चा-बच्चा सकुशल घर पहुंचे

इस मामले में जिला पंचायत अध्यक्ष गौरी शंकर कश्यप के प्रतिनिधियों ने अस्पताल में वार्ता की। पंचायत प्रतिनिधियों की मदद से जच्चा-बच्चा सुरक्षित रूप से महिला के गांव मूचबहल के मालिपारा वार्ड में लौटे। प्रतिनिधियों ने अस्पताल प्रबंधन के साथ बातचीत करके स्थिति को शांत कराया।

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परिवार सरकारी योजनाओं से वंचित

नवीना का परिवार 2000 आबादी वाले गांव में अकेला भुंजिया परिवार है। परिवार गरीब और सरकारी योजनाओं से वंचित है। बेटे की मजदूरी और बूढ़ी सास की हल्की मजदूरी के जरिए परिवार का गुजर-बसर हो रहा है। पीएम आवास योजना के तहत आवास तो मिला है, लेकिन निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है।

अस्पताल प्रबंधन की सफाई

अस्पताल संचालक चैतन्य मेहेर ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने किसी भी प्रकार से पैसे की मांग नहीं की। महिला और परिवार ने कोई शिकायत समय पर नहीं दी, इसलिए स्टाफ ने उनका ख्याल रखा।

जिला पंचायत ने लिया संज्ञान

जिला पंचायत अध्यक्ष गौरी शंकर ने मामले की गंभीरता पर ध्यान देते हुए सीएमएचओ को जांच के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि अस्पताल में जच्चा-बच्चा सुरक्षित लौटाए जाने के लिए प्रतिनिधि भेजे गए थे और अंतिम भुगतान स्वेच्छा से किया गया।

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