Nithari case Mohinder Pandher : निठारी कांड की काली कहानी मोनिंदर पंढेर की जुबानी, कहा- हां, मैं बुलाता था एस्कॉर्ट…

Rahul Goshwami
Mohinder Pandher

नोएडा: उत्तर प्रदेश के नोएडा में 2006 का निठारी कांड जहां आज भी लोगों के लिए डरावना और हैरान कर देने वाला मामला है। डी-5 कोठी के पास नाले से कई बच्चों के कंकाल बरामद हुए थे, और इस मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया। इस कांड में पहले कोठी के मालिक मोनिंदर पंढेर और उनके नौकर सुरेंद्र कोली को आरोपी माना गया था। हाल ही में कोर्ट ने दोनों को दोषमुक्त कर दिया है।

निठारी कांड की पृष्ठभूमि
याद हो कि,साल 2005-06 के दौरान निठारी इलाके में 7 से 14 साल तक की उम्र के बच्चों का लगातार गायब होना शुरू हुआ। दिसंबर 2006 में एक कॉल गर्ल की तलाश के दौरान पुलिस डी-5 कोठी पहुँची, जहां नाले से 19-20 बच्चों और महिलाओं के कंकाल बरामद हुए।

जांच के दौरान मोनिंदर पंढेर और सुरेंद्र कोली को इस मामले का जिम्मेदार माना गया। कोली बच्चों को टॉफी के लालच में बुलाने का आरोपी बताया गया। सीबीआई कोर्ट ने शुरू में उन्हें फांसी की सजा सुनाई थी, लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बाद में पर्याप्त सबूत न होने के कारण उन्हें बरी कर दिया।

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निठारी की कहानी मोनिंदर पंढेर की जुबानी
मोनिंदर ने एक निजी हिंदी न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि उन्होंने कभी कोई अपराध नहीं किया। उन्होंने बताया कि कोठी में अकेले नहीं रहते थे; खाना, सफाई और ड्राइवर के काम अलग लोग संभालते थे। रात में सिर्फ कोली ही कोठी में रहता था।

मोनिंदर ने एस्कॉर्ट सेवाओं की बात स्वीकार की, लेकिन बताया कि उनका संबंध केवल शारीरिक था और बच्चों या नाबालिगों से संबंधित नहीं था। उन्होंने कहा कि सुरेंद्र कोली पर आरोप लगाना गलत था और वह उन्हें हमेशा अच्छा इंसान लगा।

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जांच और मीडिया पर सवाल
मोनिंदर ने मीडिया और जांच पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि मामले की सही जांच नहीं हुई, और पब्लिक व मीडिया की रिपोर्टिंग ने केस को और हाइप कर दिया। उन्होंने सवाल किया कि अगर जांच सही तरीके से होती, तो सच पहले ही सामने आ जाता।

देखा जाए तो नोएडा का यह कांड अब इतिहास बन चुका है, लेकिन सच्चाई और न्याय की प्रक्रिया पर सवाल आज भी उठते हैं। मोनिंदर पंढेर और सुरेंद्र कोली की बरी होने से अब यह मामला नया मोड़ ले चुका है। इस कोर्ट ने साफ़ किया था कि काफी सबूत न होने पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

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