भोपाल। MP Transport Vision 2030: मध्यप्रदेश सरकार आम नागरिकों को सुरक्षित, सुलभ और सस्ती सार्वजनिक परिवहन सेवा उपलब्ध कराने की दिशा में बड़े पैमाने पर काम कर रही है। ‘मध्यप्रदेश परिवहन विज़न 2030-31’ के तहत राज्य के शहरी इलाकों से लेकर दूर-दराज के ग्रामीण अंचलों तक आधुनिक बस सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। इसके तहत डिजिटल टिकटिंग, समयबद्ध बस संचालन और पर्यावरण अनुकूल इलेक्ट्रिक बसों के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। ‘यात्री परिवहन विज़न समिट 2026’ की सिफारिशों के आधार पर राज्य में ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ की शुरुआत की जा चुकी है, जिसके अंतर्गत वर्तमान में 351 बसें प्रदेश के 7 प्रमुख शहरों में सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं।
प्रदेश में सार्वजनिक बस नेटवर्क को अधिक पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए डिजिटल तकनीक का व्यापक सहारा लिया जा रहा है। इंदौर, भोपाल और जबलपुर जैसे प्रमुख शहरों की सिटी बसों में यात्री ‘चलो’ (Chalo) मोबाइल ऐप के जरिए घर बैठे ऑनलाइन टिकट बुक कर रहे हैं। इस डिजिटल व्यवस्था से न केवल यात्रियों को बस की लाइव लोकेशन और समय-सारणी की सटीक जानकारी मिल रही है, बल्कि टिकटिंग व्यवस्था में पारदर्शिता आने से राजस्व संबंधी गड़बड़ियों पर भी अंकुश लग रहा है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से बसों में सीसीटीवी कैमरे और पैनिक बटन जैसी आधुनिक प्रणालियां लगाई जा रही हैं।
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मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (MPYPIL) के महत्वाकांक्षी विज़न 2030-31 के तहत भविष्य में 15,000 से अधिक सार्वजनिक बसों के संचालन का विशाल लक्ष्य तय किया गया है। इस योजना से रोजाना 30 लाख से अधिक यात्रियों को जोड़ने की तैयारी है। इसके लिए प्रदेशभर में 180 से अधिक आधुनिक बस डिपो व टर्मिनल विकसित किए जाएंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि चरणबद्ध तरीके से प्रदेश की 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को इस नेटवर्क से सीधा जोड़ा जाएगा, जिससे ग्रामीण आबादी को स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और व्यापारिक गतिविधियों के लिए आवागमन में सुलभता मिलेगी।
परिवहन व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए जन-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल को अपनाया गया है, जिसमें पारदर्शी निविदा प्रक्रिया के जरिए निजी बस संचालकों का चयन किया जा रहा है। चालकों और परिचालकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि यात्री सेवा की गुणवत्ता बनी रहे। इसके साथ ही, हरित परिवहन को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी, जिससे प्रतिवर्ष करीब 70 हजार टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। सरकार का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक बसों को इतना आकर्षक और सुविधाजनक बनाना है कि लोग निजी वाहनों की जगह सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने को प्राथमिकता दें।