चंडीगढ़। Nishaanebaz.com-Haryana Food Safety Order: खाने-पीने की चीजों में मिलावट रोकने और उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले उत्पादों से बचाने के लिए हरियाणा सरकार ने एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने निर्धारित मानकों पर खरे न उतरने वाले उत्पादों को ‘घी’ के नाम से बनाने, बेचने, स्टोर करने और सप्लाई करने पर पूरे एक साल के लिए पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। यह आदेश पूरे राज्य में तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
सरकार का यह महत्वपूर्ण फैसला ऐसे समय में आया है जब राज्य भर में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता में सुधार और मिलावटी सामानों पर नकेल कसने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग लगातार छापेमारी कर रहा है। विभाग के इस नए आदेश से बाजार में ‘घी’ के भ्रामक नामों का सहारा लेकर बेचे जा रहे घटिया और सेहत के लिए नुकसानदायक उत्पादों पर पूरी तरह रोक लग जाएगी।
किन-किन उत्पादों पर लागू होगा यह प्रतिबंध?
हरियाणा सरकार के आदेश के अनुसार, कोई भी ऐसा प्रोडक्ट जिसे ‘घी’ के नाम से बेचा, प्रचारित या प्रदर्शित किया जा रहा है, लेकिन वह FSSAI द्वारा तय संरचना और गुणवत्ता मानकों को पूरा नहीं करता, उसकी बिक्री और वितरण पर बैन रहेगा।
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प्रतिबंधित नाम: ‘घी फॉर पूजा’, ‘घी फॉर दीया’, ‘वनस्पति घी’, ‘कुकिंग घी’, ‘टेबल घी’ और ‘घी फॉर हवन’ जैसे नामों से बेचे जाने वाले सभी उत्पाद इस प्रतिबंध के दायरे में आएंगे।
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सख्त निर्देश: अब किसी भी नॉन-डेयरी या रिफाइंड/वेजिटेबल ऑयल आधारित फैट को ‘घी’ शब्द के साथ बाजार में नहीं उतारा जा सकेगा।
क्या असली और शुद्ध घी की बिक्री पर भी कोई असर पड़ेगा?
सरकार और प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस आदेश का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि शुद्ध दूध से बने असली घी की बिक्री रोक दी गई है। जो घी खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के सभी नियमों व न्यूट्रिशन पैमानों को पूरी तरह पूरा करता है, उसकी बिक्री, निर्माण और सप्लाई पहले की तरह सामान्य रूप से जारी रहेगी। यह बैन केवल भ्रामक लेबलिंग और नकली उत्पादों पर लगाया गया है।
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कब से लागू हुआ है यह आदेश?
खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा जारी यह प्रतिबंध 21 अगस्त 2026 से प्रभावी हो चुका है और अगले एक वर्ष यानी अगस्त 2027 तक लागू रहेगा। हरियाणा के खाद्य सुरक्षा आयुक्त डॉ. मनोज कुमार द्वारा जारी इस आधिकारिक आदेश में खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 (FSS Act 2006) की धारा 30(2)(a) की शक्तियों का उपयोग किया गया है।
‘एनालॉग पनीर’ और नकली मक्खन पर भी कस गया शिकंजा
घी के अलावा हरियाणा सरकार ने नकली पनीर यानी एनालॉग/नॉन-डेयरी पनीर (Analog/Non-Dairy Paneer) और मार्जरीन (Margarine) को असली मक्खन के नाम पर बेचने पर भी एक साल की रोक लगाई है।
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क्या होता है एनालॉग पनीर? यह दिखने और स्वाद में असली पनीर जैसा ही होता है, लेकिन इसमें दूध के फैट की जगह पूरी तरह या आंशिक रूप से सस्ते वेजिटेबल ऑयल और वनस्पति वसा का उपयोग किया जाता है।
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नकली मक्खन (Margarine): इसे बटर के रूप में प्रचारित कर बेचना भी अब गैर-कानूनी होगा।
व्यापार जगत और होटल इंडस्ट्री पर असर
इस सख्त फैसले का सीधा प्रभाव राज्य के होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों, कैटरिंग यूनिट्स, ईटरी और क्लाउड किचन पर पड़ेगा। इन व्यावसायिक प्रतिष्ठानों द्वारा एनालॉग पनीर या गैर-मानक फैट उत्पादों का उपयोग, स्टोरेज या ग्राहकों को परोसना पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि ग्राहकों को थाली में वही चीज मिले जिसके पैसे वे दे रहे हैं और खाद्य सुरक्षा से कोई समझौता न हो।





