नई दिल्ली। Nishaanebaz.com-Mohan Bhagwat US Speech Reactions: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत के अमेरिका (न्यूयॉर्क) में दिए गए ‘विविधता में एकता’ वाले बयान पर भारत में तीखी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल, कांग्रेस नेता राशिद अल्वी, तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद सौगत रॉय और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने इस बयान पर अपने-अपने विचार व्यक्त किए हैं।
सिब्बल का तंज: विदेश में समझदारी की बातें, घर में चुप्पी
राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने सोशल मीडिया मंच ‘X’ पर मोहन भागवत के बयान पर निशाना साधते हुए लिखा:
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कथनी और करनी का अंतर: “न्यूयॉर्क में भागवत ने कहा कि विविधता हमारी मूल एकता की सजावट है और इसकी रक्षा की जानी चाहिए। विदेश में समझदारी भरी बातें होती हैं, लेकिन घर में चुप्पी छा जाती है। केवल शब्द मायने नहीं रखते, काम बोलना चाहिए।”
सिब्बल की यह प्रतिक्रिया भागवत के उस संबोधन के बाद आई, जो उन्होंने न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में 6000 से अधिक भारतीय-अमेरिकियों और विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों के सामने दिया था।
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‘अपनी छवि बनाने के लिए ढोंग कर रहे भागवत’ – राशिद अल्वी
कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने भागवत के बयान की मंशा पर ही सवाल उठा दिए। उन्होंने कहा:
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विदेश में बोलने की जरूरत क्यों? “पहला सवाल तो यह है कि अमेरिका जाकर यह बोलने की जरूरत क्यों पड़ रही है? अगर भारत में हिंदू-मुसलमान का कोई मसला ही नहीं है, तो अचानक वहां जाकर सफाई देने की क्या जरूरत है? इसका सीधा मतलब है कि समस्या गहराई तक है।”
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ढोंग का आरोप: अल्वी ने आरोप लगाया कि आरएसएस के मुखिया अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सिर्फ अपनी छवि सुधारने के लिए ऐसा ढोंग कर रहे हैं।
Bhagwat in New York:
“Diversity is a decoration of our innate unity. It has to be protected”
Wise words abroad
Silence at homeWords don’t matter
Actions must speak !— Kapil Sibal (@KapilSibal) August 30, 2026
सौगत रॉय व मौलाना खालिद रशीद की प्रतिक्रिया
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने इस बयान को सकारात्मक तो बताया, लेकिन नियत पर संदेह व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अगर आरएसएस जैसा हिंदूवादी संगठन सहिष्णुता और दूसरे समुदायों से दोस्ती की बात करता है तो यह स्वागत योग्य है, हालांकि वे वाकई इस पर विश्वास करते हैं या नहीं, यह कहना मुश्किल है।
वहीं, AIMPLB के कार्यकारी सदस्य मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा कि भागवत ने जो बातें अमेरिका में कही हैं, उन्हें देश में जमीनी स्तर पर लागू किया जाना चाहिए, तभी इसका असली फायदा होगा और इसे वास्तविक रूप से सकारात्मक माना जाएगा।
न्यूयॉर्क में मोहन भागवत ने क्या कहा था?
अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग (AHEAD) द्वारा आयोजित ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ में मोहन भागवत ने कहा था कि ‘विविधता में एकता’ भारत के डीएनए का हिस्सा है। उन्होंने ‘वन वर्ल्ड, वन ह्यूमैनिटी’ कार्यक्रम के दौरान स्पष्ट किया था कि “यदि कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में कोई मुसलमान नहीं होना चाहिए, तो वह खुद भी हिंदू नहीं रह जाता।” भागवत ने जोर देकर कहा था कि हिंदू होने का अर्थ यह मानना है कि अलग-अलग रास्ते एक ही ईश्वर/मंजिल तक पहुंचते हैं।





