Major Security Lapse in MP: ग्वालियर। मध्य प्रदेश की ग्वालियर केंद्रीय जेल (Gwalior Central Jail) से एक बेहद सनसनीखेज और सुरक्षा में गंभीर चूक का मामला सामने आया है। संगीन और निर्मम वारदातों को अंजाम देने वाला 4 हत्याओं का दोषी और सीरियल किलर हनी दुबे पैरोल पर बाहर आने के बाद समय सीमा पूरी होने पर जेल वापस नहीं पहुंचा और फरार हो गया है।
15 दिनों की पैरोल अवधि समाप्त होने के बावजूद जब आरोपी ने जेल में सरेंडर नहीं किया, तो जेल प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन में मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जेल प्रबंधन ने ग्वालियर के बहोड़ापुर थाने में आरोपी की फरारी की आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है।
मां के साथ मिलकर की थी हत्या, 4 मर्डर का है सजायाफ्ता आरोपी
मूलतः गुना जिले का रहने वाला सीरियल किलर हनी दुबे मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के विभिन्न इलाकों में 4 निर्मम हत्याओं को अंजाम दे चुका है।
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2017 का खौफनाक हत्याकांड: वर्ष 2017 में हनी दुबे ने अपनी मां पूनम दुबे के साथ मिलकर एक व्यक्ति की बेरहमी से हत्या कर दी थी और साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से उसके शव को जला दिया था।
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दोस्तों की हत्या: इसके अलावा आरोपी ने अपने ही दो करीबी दोस्तों की बेहद नृशंस तरीके से हत्या कर दी थी।
इन सभी जघन्य अपराधों के साबित होने के बाद अदालत ने उसे आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई थी और वह ग्वालियर सेंट्रल जेल में अपनी सजा काट रहा था।
पैरोल और पुलिस निगरानी प्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
15 दिन की स्वीकृत पैरोल मिलने के बाद जब निर्धारित समय पर आरोपी को वापस जेल में दाखिल होना था, तब वह अपने परिजनों और घर से अचानक गायब हो गया। इस हाई-प्रोफाइल फरारी के बाद जेल प्रशासन की पैरोल देने की अनुशंसा प्रक्रिया और स्थानीय पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
नागरिकों और कानून विशेषज्ञों द्वारा सवाल उठाया जा रहा है कि इतने खतरनाक और आदतन सीरियल किलर को पैरोल देते वक्त स्थानीय पुलिस द्वारा उस पर 24 घंटे कड़ी निगरानी (Surveillance) क्यों नहीं रखी गई।
MP और UP पुलिस की टीमों की ताबड़तोड़ दबिश
फरारी की प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस महकमा तुरंत हरकत में आ गया है। ग्वालियर पुलिस की कई विशेष टीमें गठित कर आरोपी हनी दुबे के संभावित ठिकानों, उसके रिश्तेदारों के आवासों और पुराने आपराधिक नेटवर्क पर लगातार ताबड़तोड़ दबिश दी जा रही है।
चूंकि आरोपी का नेटवर्क उत्तर प्रदेश के क्षेत्रों से भी जुड़ा रहा है, इसलिए मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश पुलिस के बीच आपसी समन्वय बनाकर अंतरराज्यीय सीमाओं पर अलर्ट जारी कर दिया गया है और संघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।







