Alarmingly High Suicide Rate in Dhamtari: 19 साल के युवाओं से बुजुर्गों तक ने उठाया खौफनाक कदम; 95% लोगों ने फांसी लगाकर दी जान

VIKASH KHALKHO

Alarmingly High Suicide Rate in Dhamtari: धमतरी (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले से आत्महत्या के बढ़ते आंकड़े बेहद खौफनाक और समाज के लिए गहरी चिंता पैदा करने वाले हैं। साल 2026 के शुरुआती 6 महीनों (180 दिनों) की पड़ताल में खुलासा हुआ है कि केवल धमतरी जिले में कुल 174 लोगों ने आत्महत्या कर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। इन दुखद घटनाओं में भले ही पारिवारिक कलह, प्रेम प्रसंग और आर्थिक तंगी जैसी अलग-अलग वजहें दिखती हों, लेकिन गहराई से विश्लेषण करने पर ‘अत्यधिक नशा’ सबसे बड़ा और कॉमन फैक्टर बनकर सामने आया है।

हर रोज सामने आ रही औसतन एक मौत

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2026 के इन 180 दिनों में से महज 6 दिनों को छोड़ दिया जाए, तो हर दिन औसतन एक सुसाइड का मामला दर्ज किया गया है।

  • उम्र का दायरा: आत्मघाती कदम उठाने वालों में 19 वर्ष के नवयुवकों से लेकर 65 वर्ष तक के बुजुर्ग शामिल हैं। इसमें गरीब वर्ग से लेकर संपन्न परिवारों के लोग भी शामिल हैं।

  • तरीका (Method): आंकड़ों के मुताबिक, 95 फीसदी लोगों ने फांसी लगाकर अपनी जान दी, जबकि शेष 5 फीसदी मामलों में जहर का सेवन किया गया था।

नशे की लत और डिप्रेशन का घातक कॉकटेल

आत्महत्या के इन मामलों की जांच-पड़ताल करने पर प्रेम प्रसंग, घरेलू विवाद और एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर जैसे कारण सामने आए हैं। हालांकि, चौंकाने वाली बात यह है कि 90 फीसदी मामलों में पीड़ित घटना के वक्त नशे की हालत में थे।

मामले पर सीएसपी अभिषेक चतुर्वेदी ने कहा:

“चिकित्सकीय जानकारों का स्पष्ट मानना है कि अत्यधिक नशा व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता (Decision Making Ability) को शून्य या बेहद कमजोर कर देता है। इस कारण व्यक्ति अत्यधिक तनाव, हताशा या क्षणिक गुस्से में आकर ऐसा खौफनाक कदम उठा लेता है। धमतरी जिले के 13 थानों और 2 पुलिस चौकियों के अंतर्गत आने वाले अर्बन और सेमी-अर्बन क्षेत्रों से ऐसे मामले सर्वाधिक दर्ज हो रहे हैं।”

सीएसपी ने लोगों से अपील की है कि किसी भी प्रकार के तनाव या मानसिक दबाव की स्थिति में अकेले न रहें और तुरंत पुलिस या काउंसलर्स से संपर्क करें।

मानसिक स्वास्थ्य पर चुप्पी तोड़ना जरूरी: साइकोलॉजिस्ट

क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट प्रीति चांडक ने बताया कि समाज में सुसाइडल टेंडेंसी (आत्महत्या की प्रवृत्ति) तेजी से बढ़ रही है, जो न केवल बड़ों में बल्कि बच्चों में भी देखी जा रही है।

उन्होंने कहा:

“आर्थिक तंगी, मानसिक तनाव और बिगड़ते रिश्ते इसके प्रमुख कारण हैं। लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि हमारे समाज में आज भी मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात नहीं की जाती। शारीरिक अस्वस्थता होने पर लोग तुरंत डॉक्टर के पास जाते हैं, लेकिन मानसिक समस्या पर चुप्पी साध लेते हैं, जो जानलेवा साबित होती है। यदि आपके आसपास कोई व्यक्ति अत्यधिक निराशावादी बातें कर रहा हो या लंबे समय से अकेला रह रहा हो, तो बिना उसे जज किए उसकी बात सुनें और उसे मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ के पास ले जाएं।”

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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