नई दिल्ली: कोटा-बूंदी में नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के निर्माण की केंद्रीय कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में लिए गए इस ऐतिहासिक फैसले से हाड़ौती क्षेत्र की शिक्षा, व्यापार और पर्यटन की तस्वीर बदलने की उम्मीद है। इस प्रोजेक्ट पर ₹1507 करोड़ खर्च होंगे।
नया एयरपोर्ट क्यों ज़रूरी था?
- मौजूदा कोटा एयरपोर्ट छोटा और भीड़भाड़ वाला है। इसका रनवे केवल 1220 मीटर लंबा है, जिससे बड़े विमान जैसे एयरबस A-321 या बोइंग 737 नहीं उतर सकते।
- शहर के बीच में स्थित पुराना एयरपोर्ट घनी आबादी और इमारतों से घिर चुका है, जिससे इसका विस्तार या रनवे लंबा करना असंभव है।
- इसलिए, बिल्कुल नए और खुली जमीन पर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाना ही एकमात्र समाधान था।
नया एयरपोर्ट कैसा होगा?
- रनवे: लंबाई 3200 मीटर, चौड़ाई 45 मीटर, बड़े विमान आसानी से उतर और उड़ान भर सकेंगे।
- टर्मिनल बिल्डिंग: 20,000 वर्ग मीटर, मौजूदा 400 वर्ग मीटर की तुलना में विशाल।
- क्षमता: एक घंटे में 1000 यात्री, सालाना 20 लाख यात्री।
- एप्रन: सात बड़े विमान के लिए पार्किंग।
- आधुनिक सुविधाएँ: ATC ब्लॉक, फायर स्टेशन, कार पार्किंग, सभी आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर।
जीवन पर असर
- शिक्षा: कोटा भारत का ‘कोचिंग हब’ है। अब छात्र और माता-पिता आसानी से सीधे फ्लाइट ले सकेंगे।
- व्यापार: औद्योगिक केंद्र को बेहतर एयर कनेक्टिविटी से देश-दुनिया से जोड़ना आसान होगा।
- पर्यटन: चंबल नदी और बूंदी क्षेत्र पर्यटन के लिए नया आकर्षण बनेंगे।
- रोजगार: निर्माण और संचालन के दौरान हजारों लोग सीधे और कई अप्रत्यक्ष रोजगार हासिल करेंगे।
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ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट क्या है?
- ग्रीनफील्ड का मतलब है नई और खाली जमीन पर प्रोजेक्ट शुरू करना, जैसे कोटा-बूंदी एयरपोर्ट।
- पुराने एयरपोर्ट का विस्तार या आधुनिकीकरण करने वाले प्रोजेक्ट को ब्राउनफील्ड कहते हैं।
कोटा-बूंदी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट सिर्फ शहर के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह UDAN योजना की भावना को साकार करता है और कोटा को शिक्षा, उद्योग, पर्यटन और विकास के नक्शे पर नई ऊँचाई देगा।











