Paddy procurement center : गौरी शंकर गुप्ता/घरघोड़ा, रायगढ़। रायगढ़ जिले के घरघोड़ा विकासखंड स्थित नवापारा टेंढा धान खरीदी केंद्र पर किसानों के साथ गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। 16 दिसंबर 2025 को जब हमारी टीम ने खरीदी केंद्र की व्यवस्थाओं का जायजा लिया, तो पाया गया कि किसानों को स्वयं ही अपने धान को बोरी में भरने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। खरीदी केंद्र पर लेबर (मजदूरों) के अभाव के कारण किसानों को खुद ही यह मेहनत करनी पड़ रही है।
Paddy procurement center :
केंद्र पर मौजूद कुछ किसान ट्रैक्टरों से सीधे धान को बोरी में भरकर तौल के लिए तैयार करते दिखे। किसानों ने बताया कि अगर वे यह काम खुद नहीं करेंगे, तो भीड़ के कारण दो दिनों में भी तौल और भराई संभव नहीं है। किसानों ने यह सवाल भी उठाया कि कुछ दिन पहले तक सभी धान की ढलाई (डंपिंग) कर, फिर भराई और तौल किया जाता था, तो अब अचानक यह प्रक्रिया क्यों बदल दी गई है।
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किसानों ने केंद्र प्रबंधन पर सबसे गंभीर आरोप नमी के नाम पर मनमानी कटौती का लगाया है। किसानों का कहना है कि कर्मचारियों द्वारा धान में अधिक नमी दिखाकर प्रति बोरी 1 किलो तक की मनमानी कटौती की जा रही है, जिससे उन्हें बड़ा आर्थिक नुकसान हो रहा है। किसानों ने बताया कि यह कटौती खरीदी नियमों के बिल्कुल विपरीत है।
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किसानों ने जोरदार दबे पांव विरोध व्यक्त करते हुए कहा कि वे कई दिनों से इसकी शिकायत कर रहे हैं, लेकिन दो-दो नोडल अधिकारी तैनात होने के बावजूद किसी अधिकारी ने संज्ञान नहीं लिया है। किसानों ने आश्चर्य व्यक्त किया कि आखिर किसके सह पर केंद्र प्रबंधक बिना किसी डर के मनमानी खरीदी कर रहे हैं। किसानों का यह भी आरोप है कि अधिक बोलने पर धान में नमी अधिक या साफ-सुथरा नहीं होने जैसे कारण बताकर धान को वापस भी करवाया जाता है, जिससे किसानों के मन में डर बना हुआ है।
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किसानों ने याद दिलाया कि कुछ दिन पहले ही घरघोड़ा के अनुविभागीय दंडाधिकारी (SDM) ने खुले मंच से किसानों को संबोधित करते हुए कहा था कि किसी भी किसान से अधिक धान तौल कर नहीं लिया जाएगा, लेकिन केंद्र प्रबंधक खुलेआम इस आदेश की अनदेखी कर रहे हैं। पिछले वर्ष से विवादित रहा नवापारा टेंढा खरीदी केंद्र का खामियाजा इस क्षेत्र के किसानों को लगातार भुगतना पड़ रहा है।
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बड़ी संख्या में किसान सुबह से ही खरीदी केंद्र के बाहर खड़े होकर अधिकारियों का इंतजार कर रहे हैं। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही केंद्र की व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया और मनमानी कटौती बंद नहीं की गई तो आंदोलन उग्र हो सकता है और माहौल तनावपूर्ण बन सकता है। प्रशासन की इस मामले में चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं। वहीं, जब हमने समिति के प्रबंध से बात करने की कोशिश की, तो उन्होंने कहा कि “सुकती जाती समिति इसका भविष्य कहां से भरपाई करे।”











