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Business Desk: एलपीजी सिलेंडर का सस्ता विकल्प बनेगा एथेनॉल: अब पेट्रोल के बाद आपकी रसोई में एंट्री की तैयारी, कंपनियों ने कसी कमर

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Business Desk: वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और एलपीजी की कीमतों में लगातार आ रहे उतार-चढ़ाव तथा सप्लाई चेन की अनिश्चितताओं के बीच भारत के ऊर्जा क्षेत्र से एक बेहद क्रांतिकारी खबर आ रही है। पेट्रोल में एथेनॉल ब्लेंडिंग (मिश्रण) की अभूतपूर्व सफलता के बाद, अब एथेनॉल को देश के घरेलू रसोई ईंधन (किंचन फ्यूल) के रूप में इस्तेमाल करने की विधिक और तकनीकी रूपरेखा तैयार कर ली गई है। केंद्र सरकार की दूरदर्शी ‘ग्रीन एनर्जी नीति’ के तहत देश की शीर्ष सरकारी तेल कंपनियां— इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL)— इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर तेजी से काम कर रही हैं। इसके तहत बेहद जल्द बाजार में एथेनॉल आधारित कुकिंग फ्यूल और विशेष रूप से डिजाइन किए गए आधुनिक चूल्हे उतारने की तैयारी है।

आयातित एलपीजी पर निर्भरता होगी कम, घरेलू खजाने को मिलेगी बड़ी राहत

वर्तमान में भारत अपनी कुल जरूरत का 60 प्रतिशत से अधिक एलपीजी (तरल पेट्रोलियम गैस) विदेशों से आयात करता है, जिसके कारण देश के सरकारी खजाने पर भारी वित्तीय दबाव पड़ता है। हाल ही में दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी सऊदी अरामको द्वारा एलपीजी के कॉन्ट्रैक्ट प्राइस में 1% से 3% तक की बढ़ोतरी किए जाने के बाद घरेलू स्तर पर भी कीमतें प्रभावित होने की आशंका थी। ऐसे में एथेनॉल एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है। भारत में एथेनॉल का उत्पादन गन्ने के रस, मक्के और खराब या सड़े-गले अनाजों से प्रचुर मात्रा में स्वदेशी स्तर पर किया जा रहा है, जिससे यह पारंपरिक एलपीजी के मुकाबले काफी सस्ता और सुलभ बैठेगा।

सुरक्षा और सेहत का परफेक्ट कॉम्बो: न सिलेंडर फटने का डर, न जहरीला धुआं

पर्यावरण और सुरक्षा के विधिक मानक: एथेनॉल को किचन फ्यूल के रूप में अपनाने का सबसे बड़ा फायदा इसकी सुरक्षा और पर्यावरण अनुकूलता (इको-फ्रेंडली) में है। पारंपरिक कोयले या लकड़ी के चूल्हों की तुलना में यह पूरी तरह स्वच्छ है, जिससे किसी भी तरह का हानिकारक धुआं या कार्बन उत्सर्जन नहीं होता। इसके अलावा, एलपीजी सिलेंडरों के विपरीत, एथेनॉल आधारित प्रणाली में अत्यधिक दबाव न होने के कारण गैस लीक होने या अचानक भीषण धमाके के साथ सिलेंडर फटने का जानलेवा विधिक जोखिम शून्य हो जाता है। यह भारतीय महिलाओं के स्वास्थ्य और रसोई की सुरक्षा के लिहाज से एक मील का पत्थर साबित होगा।

दुनिया के कई देशों में सफल है यह मॉडल, भारत में नए युग की शुरुआत

वैश्विक स्तर पर देखा जाए तो एथेनॉल का रसोई में इस्तेमाल कोई नया प्रयोग नहीं है। अफ्रीका और एशिया महाद्वीप के कई विकासशील और विकसित देशों में इस ईंधन का सफलतापूर्वक उपयोग हो रहा है। केन्या, इथियोपिया, घाना, तंजानिया और मोजांबिक जैसे देशों में बड़े पैमाने पर अस्पतालों, हॉस्टलों और कम्युनिटी किचनों (सामुदायिक रसोइयों) में खाना पकाने के लिए एथेनॉल का ही इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा, थाईलैंड, फिलीपींस और ब्राजील जैसे देशों में भी यह एक मुख्य घरेलू ईंधन बन चुका है। ऑटोमोबाइल सेक्टर में एथेनॉल क्रांति लाने के बाद अब भारत सरकार इस मॉडल को हर भारतीय घर की रसोई तक पहुंचाने के लिए पूरी तरह मुस्तैद दिखाई दे रही है।

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VIKASH KHALKHO
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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।

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