नई दिल्ली। Nishaanebaz.com-OBC Caste Census Supreme Court: देश में आयोजित होने जा रही आगामी जनगणना-2027 के ऑनलाइन प्रारूप में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की जातियों के लिए अलग सूची यानी ‘ड्रॉप-डाउन मेनू’ (Drop-Down Menu) उपलब्ध कराने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना रुख साफ कर दिया है। शीर्ष अदालत ने इस मामले पर सीधा हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए फैसला केंद्र सरकार के पाले में डाल दिया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि जनगणना प्रक्रिया में जातियों को शामिल करने का तरीका एक नीतिगत निर्णय (Policy Decision) है, जिस पर निर्णय लेना केंद्र सरकार और प्रशासनिक तंत्र का काम है।
यह याचिका ‘ओबीसी फेडरेशन ऑफ इंडिया’ की ओर से दायर की गई थी, जिसमें मांग की गई थी कि ऑनलाइन जनगणना फॉर्म के शेड्यूल कॉलम नंबर 10 में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की तर्ज पर अन्य पिछड़ा वर्ग की जातियों की भी एक पूर्व-निर्धारित ड्रॉप-डाउन सूची दी जाए। याचिकाकर्ताओं की दलील थी कि वर्तमान व्यवस्था में एससी और एसटी वर्ग के अलावा अन्य जातियों का नाम दर्ज करने के लिए केवल ‘ओपन टेक्स्ट फील्ड’ (Open Text Field) का विकल्प दिया गया है, जिसमें लोगों को खुद अपनी जाति लिखनी पड़ती है। इससे अलग-अलग पिछड़ी जातियों का सटीक और व्यवस्थित आंकड़ा जुटाने में व्यावहारिक कठिनाइयां आ सकती हैं।
मामले की सुनवाई के दौरान फेडरेशन की तरफ से पेश हुईं वरिष्ठ अधिवक्ता अंजनी अयंगर ने पीठ को बताया कि पिछड़ा वर्ग आयोग और सरकार के समक्ष पहले भी यह मांग रखी जा चुकी है कि ऑनलाइन डिजिटल जनगणना में यह सुविधा दी जाए। हालांकि, सीजेआई सूर्यकांत की पीठ ने स्पष्ट कहा कि न्यायपालिका सरकार के नीतिगत मामलों में सीधे दिशा-निर्देश जारी नहीं कर सकती। इसके साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं को यह राहत और छूट दी है कि वे अपनी इस मांग और तर्कों के साथ भारत के जनगणना रजिस्ट्रार जनरल (Registrar General of India) के समक्ष अपना विस्तृत अभ्यावेदन प्रस्तुत कर सकते हैं, ताकि प्रशासनिक स्तर पर इस पर विचार किया जा सके।
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सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय के अधीन काम करने वाले जनगणना रजिस्ट्रार जनरल के कार्यालय पर टिक गई हैं। आगामी जनगणना में ओबीसी वर्ग के आंकड़ों के संकलन और डिजिटल फॉर्म के स्वरूप को लेकर प्रशासनिक स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं, यह देखना काफी महत्वपूर्ण होगा।