DPDP Act Rules Supreme Court Challenge: ‘न्यूजरूम बंद हो जाएंगे’, डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट का किया रुख

VIKASH KHALKHO
Supreme Court Railway TTE

नई दिल्ली (सुमित सक्सेना)। Nishaanebaz.com-DPDP Act Rules Supreme Court Challenge: देश में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट के नए नियमों को लेकर कानूनी और मीडिया जगत में बड़ा संग्राम छिड़ गया है। डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) ने नए डेटा प्रोटेक्शन कानून और उसकी नियमावली को प्रेस की स्वतंत्रता तथा नागरिकों के सूचना के अधिकार का हनन बताते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में चेतावनी दी गई है कि यदि इन नियमों पर छूट न मिली तो देश भर के न्यूजरूम बंद हो जाएंगे। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है, हालांकि न्यायालय ने नियमों पर तुरंत एकतरफा अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

यह संवेदनशील मामला भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया। द इंडियन एक्सप्रेस, द हिंदू, इंडिया टुडे, टाइम्स ग्रुप, Zee, NDTV और नेटवर्क 18 जैसे देश के बड़े पारंपरिक मीडिया घरानों के डिजिटल विंग्स का प्रतिनिधित्व कर रही वरिष्ठ अधिवक्ता माधवी दीवान ने दलील दी कि पत्रकारिता और खोजी रिपोर्टिंग के लिए नियमों में कोई विशेष छूट नहीं दी गई है। इससे सूत्रों की गोपनीयता खतरे में पड़ जाएगी और हर रिपोर्टिंग से पहले संबंधित व्यक्ति की सहमति मांगना व्यावहारिक रूप से असंभव हो जाएगा।

दीवान ने पीठ के समक्ष जोर देकर कहा कि ‘लेगेसी मीडिया’ द्वारा दायर इस व्यापक याचिका में यह स्पष्ट किया गया है कि लाइव टीवी और त्वरित न्यूज रिपोर्टिंग में डेटा प्रिंसिपल से पूर्व अनुमति लेना पत्रकारिता के मूल स्वरूप को ही समाप्त कर देगा। सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि मीडिया घराने इस क्षेत्र के विशेषज्ञ हैं और उन्हें सरकार को अपने सुझाव देने चाहिए ताकि नियमों के किसी भी संभावित दुरुपयोग को रोका जा सके। फिलहाल शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया है और मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर तय की है।

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DNPA ने अपनी याचिका में मांग की है कि पत्रकारिता के कार्य को इस कठोर कानून के कई प्रावधानों से मुक्त रखा जाए ताकि स्वतंत्र पत्रकारिता पर कोई विपरीत प्रभाव न पड़े। यदि खोजी रिपोर्टिंग में शामिल पत्रकारों को डेटा सहमति के नियमों में न बांधा गया, तो भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का पर्दाफाश करना लगभग नामुमकिन हो जाएगा। 17 नवंबर को होने वाली सुनवाई पर देश भर के मीडिया जगत और कानूनी विशेषज्ञों की निगाहें टिकी हुई हैं, जहां यह तय होगा कि डेटा गोपनीयता और प्रेस की स्वतंत्रता के बीच संतुलन कैसे कायम किया जाए।

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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