Sunday, September 27, 2026
Home Business एन चंद्रशेखरन ने छोड़ा टाटा संस चेयरमैन पद! फरवरी 2027 तक संभालेंगे...

एन चंद्रशेखरन ने छोड़ा टाटा संस चेयरमैन पद! फरवरी 2027 तक संभालेंगे जिम्मेदारी, आखिर क्यों आया फैसला?

N Chandrasekaran Resignation: एन चंद्रशेखरन इस्तीफा: टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। कंपनी के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने अपने पद से इस्तीफा देने का फैसला किया है। हालांकि, वह तुरंत पद नहीं छोड़ेंगे और फरवरी 2027 तक चेयरमैन की जिम्मेदारी संभालते रहेंगे। उनका यह फैसला 18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की AGM से ठीक पहले सामने आया है।

एन चंद्रशेखरन इस्तीफा ऐसे समय हुआ है जब टाटा संस की महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है। रिपोर्टों के मुताबिक, चंद्रशेखरन के कार्यकाल को आगे बढ़ाने को लेकर टाटा ट्रस्ट्स के भीतर सहमति नहीं बन पा रही थी। टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है, इसलिए ट्रस्ट की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

नोएल टाटा के रुख से जुड़ी चर्चा
एन चंद्रशेखरन इस्तीफा के पीछे टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा के रुख को लेकर भी चर्चा है। रिपोर्टों के अनुसार, चंद्रशेखरन के कार्यकाल को पांच साल और बढ़ाने के प्रस्ताव पर पूरी सहमति नहीं बन पाई थी। नए कारोबार में बड़े निवेश और उनके प्रदर्शन को लेकर भी सवाल उठाए जाने की बात सामने आई है।फरवरी 2024 में बोर्ड ने चंद्रशेखरन के अगले पांच साल के कार्यकाल की सिफारिश की थी। बाद में इस प्रस्ताव को लेकर स्थिति बदलती गई और आखिरकार उनका कार्यकाल बढ़ाने का फैसला आगे नहीं बढ़ सका।

चंद्रशेखरन ने खुद बताई फैसले की वजह
एन चंद्रशेखरन इस्तीफा को लेकर खुद चंद्रशेखरन ने भी अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उनके अनुसार, उनका मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त होना है। टाटा ट्रस्ट्स की ओर से उनके अगले पांच साल के कार्यकाल के विस्तार की सिफारिश की गई थी और इस प्रस्ताव को कंपनी की संबंधित समिति और बोर्ड के सामने भी रखा गया था।उनके मुताबिक, बोर्ड में प्रस्ताव को सर्वसम्मत समर्थन नहीं मिल पाया। इसके बाद करीब छह महीने तक इस मामले पर अंतिम फैसला नहीं हो सका। चंद्रशेखरन ने कहा कि टाटा संस जैसे बड़े संस्थान के लिए नेतृत्व को लेकर स्पष्टता जरूरी है, खासकर तब जब कई बड़े रणनीतिक प्रोजेक्ट महत्वपूर्ण चरण में हैं।
Read more: CG News: भिलाई में नाबालिग को धमकाकर चोरी का खेल! कांग्रेस पार्षद के बेटे समेत 3 गिरफ्तार

2017 में संभाली थी टाटा ग्रुप की कमान
एन चंद्रशेखरन इस्तीफा टाटा ग्रुप के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने करीब नौ साल तक समूह की कमान संभाली। 2017 में उन्हें टाटा संस का चेयरमैन बनाया गया था। वह टाटा परिवार से बाहर के पहले पेशेवर मैनेजर थे, जिन्होंने टाटा समूह की शीर्ष होल्डिंग कंपनी का नेतृत्व किया।इससे पहले चंद्रशेखरन टीसीएस के प्रमुख रह चुके थे। टाटा संस की कमान संभालने के बाद उन्होंने समूह के कारोबार को कई नए क्षेत्रों में आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।

एयर इंडिया से सेमीकंडक्टर तक बड़े फैसले
एन चंद्रशेखरन इस्तीफा के बीच उनके कार्यकाल की उपलब्धियों पर भी नजर है। उनके नेतृत्व में टाटा ग्रुप ने एविएशन, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, बैटरी और डिजिटल कारोबार जैसे क्षेत्रों में बड़े कदम उठाए।एयर इंडिया का अधिग्रहण टाटा समूह के सबसे बड़े फैसलों में शामिल रहा। इसके अलावा सेमीकंडक्टर और बैटरी कारोबार में भी समूह ने बड़े निवेश की योजनाएं आगे बढ़ाईं।

टाटा ग्रुप का रेवेन्यू हुआ दोगुने से ज्यादा
एन चंद्रशेखरन इस्तीफा के बाद सामने आए आंकड़े बताते हैं कि उनके कार्यकाल में टाटा ग्रुप का कारोबार काफी बढ़ा। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2020 में समूह का रेवेन्यू करीब ₹7.89 लाख करोड़ था, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर करीब ₹16.24 लाख करोड़ हो गया।इसी अवधि में समूह का शुद्ध मुनाफा भी करीब ₹32,000 करोड़ से बढ़कर ₹1.71 लाख करोड़ तक पहुंच गया। वहीं टाटा ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप भी कई गुना बढ़ा।

रतन टाटा के निधन के बाद बदला माहौल
एन चंद्रशेखरन इस्तीफा की खबर टाटा ग्रुप के अंदर नेतृत्व और ट्रस्ट के बीच संबंधों को लेकर भी चर्चा बढ़ा रही है। रतन टाटा के निधन के बाद टाटा ट्रस्ट्स के भीतर मतभेदों को लेकर कई तरह की खबरें सामने आती रही हैं।कुछ ट्रस्टियों के पद छोड़ने और ग्रुप के महत्वपूर्ण फैसलों पर अंदरूनी मतभेद की चर्चा भी हुई। हालांकि, टाटा समूह के कामकाज पर इन घटनाओं के असर को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं।

अब नए नेतृत्व की तलाश होगी?
एन चंद्रशेखरन इस्तीफा के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि फरवरी 2027 के बाद टाटा संस की कमान किसके हाथ होगी। चंद्रशेखरन के पास टाटा संस के अलावा टाटा ग्रुप की कई बड़ी कंपनियों से जुड़ी जिम्मेदारियां भी हैं।ऐसे समय में उनका उत्तराधिकारी चुनना टाटा समूह के लिए बेहद अहम होगा, क्योंकि समूह सेमीकंडक्टर फैब, ईवी बैटरी, एयर इंडिया के एकीकरण और दूसरे बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है।

टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की बड़ी भूमिका
एन चंद्रशेखरन इस्तीफा के बाद टाटा संस की शेयरहोल्डिंग भी चर्चा में है। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है। यही वजह है कि चेयरमैन के चयन और नेतृत्व से जुड़े बड़े फैसलों में ट्रस्ट्स की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।टाटा ग्रुप आज कई देशों में अलग-अलग क्षेत्रों में कारोबार करता है। ऐसे में चेयरमैन पद पर होने वाला बदलाव केवल टाटा संस तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समूह की भविष्य की रणनीति पर भी इसका असर पड़ सकता है।

फरवरी 2027 तक जारी रहेगी जिम्मेदारी
एन चंद्रशेखरन इस्तीफा का मतलब यह नहीं है कि वह तत्काल टाटा संस से अलग हो जाएंगे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वह फरवरी 2027 तक चेयरमैन के पद पर बने रहेंगे। इस दौरान कंपनी को नए नेतृत्व की तैयारी करने का समय मिलेगा।अब सबकी नजर 18 अगस्त की AGM और उसके बाद होने वाले घटनाक्रम पर है। चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी को लेकर आने वाले महीनों में तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।

Share The News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here