भोपाल : मध्य प्रदेश में मौसम का मिजाज लगातार बिगड़ा हुआ है। कड़ाके की ठंड के बीच अचानक हुई तेज बारिश और ओलावृष्टि ने आम जनजीवन के साथ-साथ किसानों की परेशानियां भी बढ़ा दी हैं। बीते दो दिनों में प्रदेश के 16 से अधिक जिलों में बारिश और ओले गिरने से तापमान में गिरावट दर्ज की गई है और खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है।
नया स्ट्रॉन्ग सिस्टम बना कारण
मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में सक्रिय साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ लाइन के चलते एक नया स्ट्रॉन्ग सिस्टम बना है, जो आने वाले दिनों में भी असर दिखाएगा। 30 जनवरी को प्रदेश के उत्तरी हिस्सों में ठंड का असर और तेज होने की संभावना है, जबकि 31 जनवरी और 1 फरवरी को व्यापक स्तर पर बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की गई है।
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इन जिलों में अलर्ट जारी
31 जनवरी को ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, विदिशा, सागर, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, राजगढ़ और शाजापुर में बारिश और ओले गिरने की आशंका जताई गई है।
वहीं 1 फरवरी को भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, देवास, सीहोर, हरदा, नर्मदापुरम, रायसेन, नरसिंहपुर, दमोह, कटनी, सतना, रीवा सहित 30 से ज्यादा जिलों में मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है।
किसानों की फसलों पर भारी मार
बारिश और ओलावृष्टि का सबसे ज्यादा असर गेहूं, चना और सरसों की फसलों पर पड़ा है। कई इलाकों में पकी और कटाई के लिए तैयार फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं। किसानों का कहना है कि अगर बारिश का यह दौर जारी रहा, तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।
कब तक रहेगा असर
मौसम विभाग का अनुमान है कि 30 जनवरी से सक्रिय हुआ यह सिस्टम फरवरी के पहले सप्ताह तक प्रभावी रहेगा। यानी प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक मौसम से राहत मिलने की संभावना कम है। प्रशासन ने किसानों को सतर्क रहने और फसल सुरक्षा के उपाय अपनाने की सलाह दी है।











