MP UCC Draft Update: एमपी यूसीसी ड्राफ्ट अपडेट के तहत मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की दिशा में तेजी से काम चल रहा है। इसके लिए गठित हाई लेवल कमेटी लगातार विभिन्न वर्गों, सामाजिक संगठनों और आयोगों से सुझाव ले रही है।
कमेटी की अध्यक्षता कर रहे उत्तराखंड के पूर्व सचिव शत्रुघ्न सिंह ने बताया है कि यूसीसी का अंतिम ड्राफ्ट अगले 8 से 10 दिनों में तैयार किया जा सकता है। इसके बाद राज्य सरकार इसे आगामी मानसून सत्र में विधानसभा के सामने रख सकती है।
एमपी यूसीसी ड्राफ्ट अपडेट में सबसे ज्यादा चर्चा लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े प्रस्तावों को लेकर हो रही है। कमेटी के सामने इस विषय पर कई सुझाव आए हैं और इन्हें ड्राफ्ट का हिस्सा बनाने पर विचार किया जा रहा है।प्रस्ताव के अनुसार यदि दो वयस्क व्यक्ति लिव-इन रिलेशनशिप में रहने का फैसला करते हैं, तो उन्हें 30 दिनों के भीतर अपना पंजीयन कराना पड़ सकता है।
महिलाओं और बच्चों के अधिकारों पर फोकस
एमपी यूसीसी ड्राफ्ट अपडेट के मुताबिक लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े मामलों में महिलाओं और बच्चों के हितों को प्राथमिकता देने पर विचार किया जा रहा है।यदि किसी कारण से संबंध समाप्त हो जाता है, तो महिला और बच्चे के भरण-पोषण से जुड़े प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं। इससे भविष्य में विवाद की स्थिति में कानूनी स्पष्टता बढ़ने की उम्मीद है।
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बच्चों को मिल सकते हैं समान अधिकार
एमपी यूसीसी ड्राफ्ट अपडेट के तहत एक महत्वपूर्ण सुझाव यह भी है कि लिव-इन रिलेशनशिप से जन्म लेने वाले बच्चों को भी सामान्य बच्चों की तरह संपत्ति और अन्य कानूनी अधिकार मिलें।कमेटी का मानना है कि बच्चों के अधिकारों को लेकर किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए। इसी दिशा में नियम तैयार किए जा रहे हैं।
झूठे मामलों में कमी आने की उम्मीद
एमपी यूसीसी ड्राफ्ट अपडेट में यह भी चर्चा हुई है कि स्पष्ट कानूनी व्यवस्था बनने से रिश्तों में उत्पन्न होने वाले कुछ विवादों में कमी आ सकती है।हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय फाइनल ड्राफ्ट और सरकार की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा।
धार्मिक संगठनों ने जताई आपत्ति
एमपी यूसीसी ड्राफ्ट अपडेट के तहत सामने आए लिव-इन प्रस्तावों पर विभिन्न संगठनों की अलग-अलग राय सामने आई है।कुछ हिंदू संगठनों ने इसे भारतीय संस्कृति के विपरीत बताया है, जबकि कुछ मुस्लिम संगठनों ने भी इस प्रस्ताव पर आपत्ति दर्ज कराई है। कमेटी इन सुझावों और आपत्तियों पर विचार कर रही है।
आदिवासी समुदाय को लेकर अलग दृष्टिकोण
एमपी यूसीसी ड्राफ्ट अपडेट में मुख्यमंत्री मोहन यादव पहले ही संकेत दे चुके हैं कि जनजातीय समुदाय को यूसीसी के दायरे से अलग रखा जा सकता है।कमेटी को आदिवासी प्रतिनिधियों की ओर से सुझाव मिला है कि आदिवासी विवाहों में न्यूनतम उम्र सीमा निर्धारित की जानी चाहिए। इससे बाल विवाह जैसी समस्याओं पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है।
मानसून सत्र पर टिकी निगाहें
एमपी यूसीसी ड्राफ्ट अपडेट के अनुसार अब सबकी नजर फाइनल ड्राफ्ट पर है। यदि तय समय में मसौदा तैयार हो जाता है, तो इसे मानसून सत्र के दौरान विधानसभा में पेश किया जा सकता है।राज्य में यूसीसी को लेकर चल रही प्रक्रिया आने वाले दिनों में और अधिक चर्चा का विषय बन सकती है।









