Saturday, August 29, 2026
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Mahakaleshwar Bhasma Aarti : महाकाल मंदिर में ब्रह्म मुहूर्त की दिव्य भस्म आरती, “हर-हर महादेव” के जयकारों से गूंजा उज्जैन

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उज्जैन स्थित विश्वप्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में शनिवार तड़के ब्रह्म मुहूर्त में भव्य भस्म आरती का आयोजन वैदिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ। सुबह लगभग चार बजे जैसे ही गर्भगृह के पट खुले, “हर-हर महादेव” और “जय श्री महाकाल” के जयकारों से पूरा परिसर गुंजायमान हो उठा।

देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से आए श्रद्धालुओं ने इस पावन क्षण का साक्षात अनुभव किया।

पंचामृत अभिषेक से आरंभ हुआ अनुष्ठान

भस्म आरती की शुरुआत भगवान महाकाल के पारंपरिक पंचामृत अभिषेक से हुई। जल, दूध, दही, घी, शहद और शर्करा से विधिवत अभिषेक किया गया। इस दौरान रुद्रपाठ, शंखध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चार ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। श्रद्धालु ध्यानमग्न होकर इस दिव्य अनुष्ठान का दर्शन करते रहे।

भस्म श्रृंगार का गूढ़ संदेश

अभिषेक के उपरांत भगवान महाकाल का भस्म से अलौकिक श्रृंगार किया गया। सनातन परंपरा में भस्म जीवन की नश्वरता और वैराग्य का प्रतीक मानी जाती है। यह संदेश देती है कि सांसारिक मोह-माया क्षणिक है और ईश्वर भक्ति ही शाश्वत है। इस दिव्य दृश्य को देखकर कई श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

साधना और सकारात्मकता का संगम

पूरे अनुष्ठान के दौरान मंदिर परिसर मंत्र-जप, ध्यान और साधना की ऊर्जा से सराबोर रहा। धार्मिक मान्यता है कि भस्म आरती के दर्शन से मानसिक शांति, आत्मिक शुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु इस अनूठी परंपरा का हिस्सा बनने उज्जैन पहुंचते हैं।

वैश्विक आस्था का केंद्र

महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की जीवंत पहचान है। उज्जैन का यह ज्योतिर्लिंग आज भी विश्वभर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक चेतना का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

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