भोपाल: मध्य प्रदेश में आगामी बोर्ड परीक्षाओं से पहले नकल माफिया और पेपर लीक के मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है। पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता पीसी शर्मा ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश में वर्षों से नकल माफिया सक्रिय है, लेकिन उस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती।
पेपर लीक और नकल पर सरकार घिरी
पीसी शर्मा का कहना है कि हर साल परीक्षाओं के दौरान पेपर लीक और नकल के मामले सामने आते हैं, फिर भी जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती। उनके अनुसार इस लापरवाही की वजह से प्रदेश के छात्र-छात्राएं दोहरी मार झेल रहे हैं—एक तरफ मेहनत करने वाले विद्यार्थियों का नुकसान होता है और दूसरी तरफ शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं।
कई संभागों को बताया नकल माफिया का केंद्र
पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि ग्वालियर, चंबल, विंध्य और निमाड़ क्षेत्र नकल माफिया के बड़े केंद्र बन चुके हैं। उनका दावा है कि यदि सरकार निष्पक्ष जांच कराए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस बार की परीक्षाओं में फिर से व्यवस्थाओं की पोल खुल सकती है।
बीजेपी संगठन और नियुक्तियों पर भी निशाना
पीसी शर्मा ने केवल परीक्षा व्यवस्था ही नहीं, बल्कि बीजेपी के अंदरूनी संगठनात्मक हालात पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में बिना लेन-देन के कोई पद नहीं मिलता और निगम-मंडलों में नियुक्तियों को लेकर खेमों के बीच खींचतान चल रही है।
जिला प्रभारी नियुक्ति पर उठे सवाल
उनके अनुसार जिला प्रभारियों की नियुक्ति इसलिए की जा रही है ताकि संभावित राजनीतिक नुकसान को नियंत्रित किया जा सके। शर्मा ने यह भी कहा कि असली कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हो रही है और पदों का उपयोग भ्रष्टाचार की राजनीति को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है।
चुनावी माहौल में बढ़ेगा विवाद
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बोर्ड परीक्षाओं, शिक्षा व्यवस्था और संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर उठे ये मुद्दे आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति को और गरमा सकते हैं। अब देखना होगा कि सरकार इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।













