मऊगंज : मध्यप्रदेश के मऊगंज जिले में धान उपार्जन व्यवस्था को कठघरे में खड़ा करने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। जिस ट्रक को एक दिन पहले बॉर्डर पर संदिग्ध मानते हुए निगरानी कैमरों में रिकॉर्ड किया गया था, वही ट्रक अगले ही दिन खुलेआम सरकारी धान खरीदी केंद्र के भीतर खड़ा मिला। सबसे गंभीर पहलू यह है कि इस पूरे प्रकरण में रिश्वत के लेनदेन की चर्चा वाला वीडियो भी सामने आया है।
संदिग्ध ट्रक और बॉर्डर पर एंट्री
मामला ट्रक नंबर MP 20 HB 6439 से जुड़ा है, जो 23 दिसंबर की शाम करीब 6 बजे धान उपार्जन चौकी पर पहुंचा। सूत्रों के अनुसार यह ट्रक बिना वैध दस्तावेजों के मध्यप्रदेश की सीमा में दाखिल हुआ। बॉर्डर पर कथित तौर पर पैसे के लेनदेन की चर्चा रही, जिसकी तस्वीरें और वीडियो कैमरों में कैद हुए।
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कलेक्टर के निर्देश पर रात में छापा
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर संजय जैन के निर्देश पर देर रात करीब 9 बजे प्रशासन ने कार्रवाई की। तहसीलदार शिवम गौतम और नायब तहसीलदार बुद्धसेन माझी की टीम ने पटेहरा धान खरीदी केंद्र का औचक निरीक्षण किया।
फर्जी और पुराने बिल से खुली पोल
निरीक्षण के दौरान वही संदिग्ध ट्रक खरीदी केंद्र के अंदर खड़ा मिला। चालक द्वारा प्रस्तुत किया गया बिल 22 नवंबर 2025 का था। सवाल यह उठ रहा है कि बिहार से लदा धान एक महीने बाद मध्यप्रदेश कैसे पहुंचा? इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि पुराने और फर्जी बिलों के सहारे अवैध धान खपाने की कोशिश की जा रही थी।
जांच के घेरे में अधिकारी
प्रशासन ने धान से लदे ट्रक को जब्त कर विस्तृत जांच शुरू कर दी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि बॉर्डर पर पहले से संदिग्ध ट्रक को सीमा पार करने की अनुमति किसने दी? कलेक्टर की सख्ती के बाद संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है।











