नई दिल्ली। लोकगायिका मैथिली ठाकुर के राजनीति में आने की चर्चा अब लगभग तय मानी जा रही है। हाल ही में उन्होंने बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं नित्यानंद राय और विनोद तावड़े से मुलाकात की, जिसके बाद यह संकेत और मजबूत हो गया है कि वो जल्द ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सदस्यता ले सकती हैं। हालांकि, पार्टी उन्हें कहां से चुनाव मैदान में उतारेगी, यह अभी तय नहीं हुआ है।
मैथिली ठाकुर ने कहा कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीति और उनके नेतृत्व से गहराई से प्रभावित हैं। दिलचस्प बात यह है कि जिस दिन प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार शपथ ली थी, उसी तारीख यानी 7 अक्टूबर को मैथिली ठाकुर भी 25 वर्ष की हो चुकी हैं। लोकसंगीत में लोकप्रियता हासिल करने के बाद मैथिली अब राजनीति के मंच पर उतरने की तैयारी में हैं।
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बीजेपी, मैथिली ठाकुर के जरिए ब्राह्मण और महिला वोट बैंक दोनों को साधने की कोशिश कर रही है। जिस तरह पार्टी ने भोजपुरी स्टार पवन सिंह को ठाकुर वोटों के लिए शामिल किया था, उसी तरह मैथिली के माध्यम से ब्राह्मण मतदाताओं तक पहुंच बनाने की रणनीति है। हालांकि, दोनों में बड़ा अंतर यह है कि मैथिली निर्विवाद छवि वाली कलाकार हैं, जबकि पवन सिंह का नाम कई विवादों में घिरा रहा है।
मैथिली ठाकुर की लोकप्रियता सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं है। 2023 में उन्हें चुनाव आयोग ने बिहार का ‘स्टेट आइकन’ नियुक्त किया था। मतदाता जागरूकता अभियानों में उनकी सक्रिय भूमिका रही है। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनके कई सांस्कृतिक आयोजनों में जुड़ाव रहा है — चाहे वह अयोध्या राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हो या नेशनल क्रिएटर्स अवार्ड का मंच, हर जगह उनकी उपस्थिति ने भाजपा के सांस्कृतिक और धार्मिक संदेशों को बल दिया है।
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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी मैथिली ठाकुर को मिथिलांचल, विशेष रूप से मधुबनी या बेनीपट्टी सीट से उतार सकती है। मिथिला क्षेत्र को “सीता माता की भूमि” कहा जाता है, और इस भावनात्मक जुड़ाव को भुनाने की तैयारी पार्टी पहले से कर रही है। 8 अगस्त 2025 को सीतामढ़ी में सीता मंदिर के भूमिपूजन के बाद यह क्षेत्र भाजपा के लिए धार्मिक-सांस्कृतिक दृष्टि से और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।
दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी ने बेनीपट्टी से शुभदा यादव को टिकट देकर मैदान तैयार कर लिया है। ऐसे में यदि बीजेपी मैथिली ठाकुर को इस सीट से उतारती है, तो मुकाबला दिलचस्प हो सकता है — एक तरफ लोकगायिका की लोकप्रियता और सांस्कृतिक जुड़ाव, तो दूसरी ओर राजनीतिक अनुभव का दावा।
मैथिली ठाकुर ने कहा है कि वे “अपने क्षेत्र से राजनीति की शुरुआत” करना चाहेंगी। वे मिथिलांचल की ब्राह्मण समुदाय से हैं, जो क्षेत्र में निर्णायक वोट बैंक माना जाता है। उनके राजनीति में उतरने से न केवल बीजेपी को ब्राह्मण वोटों का लाभ मिल सकता है, बल्कि महिला मतदाताओं में भी पार्टी की पकड़ मजबूत होने की उम्मीद है।








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