Mahasamund Paddy Scam : महासमुंद। कबीरधाम जिले के बाद अब महासमुंद के बागबाहरा धान संग्रहण केंद्र में करोड़ों रुपये के धान घोटाले का एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। संग्रहण केंद्र से लगभग 18,433 क्विंटल धान कम पाया गया है, जिसकी बाजार कीमत 5.71 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस भारी नुकसान के लिए केंद्र प्रभारी ने चूहों, दीमक और पक्षियों को जिम्मेदार ठहराया है, जिसे जानकार भ्रष्टाचार छिपाने का एक नया बहाना मान रहे हैं।
मामले के अनुसार, बागबाहरा संग्रहण केंद्र में धान के स्टॉक में 3.65 प्रतिशत की भारी कमी पाई गई है। गौर करने वाली बात यह है कि शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि यदि स्टॉक में 2 प्रतिशत से अधिक की कमी आती है, तो संबंधित प्रभारी को तत्काल निलंबित कर विभागीय जांच और एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। हालांकि, इतनी बड़ी गड़बड़ी के बावजूद अब तक प्रशासन ने केवल नोटिस जारी करने की औपचारिकता निभाई है, जिससे जांच की गंभीरता पर सवाल उठ रहे हैं।
प्रशासन मार्कफेड के माध्यम से संग्रहण केंद्रों में धान के सुरक्षित रखरखाव, परिवहन और सुरक्षा के लिए हर साल करोड़ों रुपये खर्च करता है। इसके बावजूद इतनी बड़ी मात्रा में धान का गायब होना और उसे चूहों के सिर मढ़ना गले नहीं उतर रहा है। केंद्र प्रभारी का तर्क है कि धान आवक के समय नमी 17 प्रतिशत थी जो जावक के समय कम हो गई, साथ ही कीटों और पक्षियों ने भी नुकसान पहुँचाया।
हाल ही में कवर्धा जिले में भी इसी तरह 7 करोड़ रुपये का धान चूहों द्वारा खा जाने का दावा किया गया था। अब महासमुंद में भी वैसा ही मामला दोहराए जाने से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि संग्रहण केंद्रों में भ्रष्टाचार का यह एक नया पैटर्न बन गया है। शासन के कड़े नियमों के बावजूद कार्रवाई में हो रही देरी ने विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका को भी जन्म दे दिया है।
डीएमओ ने इस मामले में स्वीकार किया है कि बागबाहरा केंद्र प्रभारी को शॉर्टेज के लिए नोटिस जारी किया गया है और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अब देखना यह होगा कि क्या शासन अपने ही आदेशों का पालन करते हुए दोषियों पर एफआईआर दर्ज करता है या चूहों को दोषी मानकर करोड़ों की इस चपत को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।











