Wednesday, September 2, 2026
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MP News: टीकमगढ़ में कलेक्टर का फर्जी आदेश बनाकर राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर की कोशिश, दो दोषियों को 5 साल की सजा

[nishaanebaz.com] MP News: जमील खान \टीकमगढ़। मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिले में कलेक्टर के नाम से फर्जी आदेश तैयार कर राजस्व अभिलेखों में हेरफेर कराने की कोशिश के मामले में अदालत ने दो आरोपियों को दोषी ठहराया है। दिगौड़ा थाना क्षेत्र से जुड़े इस मामले में चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश कमलेश भरकुंदिया की अदालत ने दोनों दोषियों को अलग-अलग धाराओं में सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। मामले में शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक जटाशंकर श्रोती ने पैरवी की।

कलेक्टर न्यायालय के नाम से तैयार किया था फर्जी आदेश

मामला वर्ष 2020 का है। जानकारी के अनुसार, एसडीओ जतारा न्यायालय में चल रहे एक प्रकरण के आदेश में सामने आया कि आरोपियों ने कलेक्टर न्यायालय टीकमगढ़ के नाम से 30 मई 2019 का कथित फर्जी आदेश तैयार कराया था।आरोप था कि इस फर्जी आदेश के आधार पर पटवारी के माध्यम से राजस्व रिकॉर्ड में अमल कराने का प्रयास किया गया। मामला सामने आने के बाद राजस्व विभाग में इसकी जांच शुरू हुई और बाद में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।

10 दिसंबर 2020 को दर्ज हुआ था मामला

इस पूरे मामले का खुलासा 10 दिसंबर 2020 को हुआ था। नायब तहसीलदार, वृत्त दिगौड़ा की शिकायत पर दिगौड़ा थाने में प्रकरण दर्ज किया गया।जांच के दौरान पुलिस ने फर्जी आदेश तैयार करने और उसके आधार पर राजस्व अभिलेखों में बदलाव कराने के कथित प्रयास से जुड़े तथ्यों को जुटाया। इसके बाद मामला अदालत में पहुंचा और आरोपियों के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया शुरू हुई।

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17 गवाह और 16 दस्तावेजों से साबित हुए आरोप

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोपों को साबित करने के लिए 17 गवाहों के बयान कराए। इसके साथ ही अदालत के समक्ष 16 महत्वपूर्ण दस्तावेज भी पेश किए गए।अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर अदालत ने दोनों आरोपियों को संबंधित धाराओं में दोषी माना और सजा सुनाई।

रामबगस यादव को 5 साल तक की सजा

अदालत ने रामबगस यादव (79), निवासी वैदौरा को अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाई है। उसे धारा 420 और 468 के तहत 4-4 साल के सश्रम कारावास की सजा दी गई।इसके अलावा धारा 467 के तहत 5 साल का सश्रम कारावास और 7 हजार रुपये अर्थदंड तथा धारा 471 के तहत 2 साल के कारावास से दंडित किया गया है।

हरनारायण खरे को भी सश्रम कारावास

दूसरे आरोपी हरनारायण खरे (66), निवासी जरूआ को अदालत ने धारा 120बी और 420 के तहत 4-4 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। दोनों धाराओं में उसे 3-3 हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया गया है।अदालत के फैसले के बाद फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर कराने की कोशिश के मामले में दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया गया है।

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फर्जी दस्तावेज के जरिए रिकॉर्ड बदलने की कोशिश पर अदालत का फैसला

यह मामला सरकारी न्यायालय के नाम से फर्जी आदेश तैयार करने और उसके आधार पर राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव कराने के प्रयास से जुड़ा था। अदालत के समक्ष प्रस्तुत गवाहों और दस्तावेजों के आधार पर आरोप प्रमाणित होने के बाद दोनों आरोपियों को सजा सुनाई गई।अदालत के फैसले को सरकारी दस्तावेजों और राजस्व अभिलेखों में फर्जीवाड़े से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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