- रीवा। Nishaanebaz.com-Rewa Corex City Controversy: सफेद शेरों की धरती, ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक पहचान के लिए देश-दुनिया में विख्यात मध्य प्रदेश का रीवा शहर इन दिनों एक शर्मनाक और गंभीर चर्चा के केंद्र में है। सोशल मीडिया और इंटरनेट सर्च इंजन गूगल पर रीवा को कथित तौर पर ‘कोरेक्स सिटी’ और नंबर-वन बताए जाने वाले तंज ने शहर की साख पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि इस डिजिटल रैंकिंग की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है, लेकिन शहर की गलियों में नशे के बढ़ते कारोबार ने इस दर्दनाक सच्चाई को उजागर कर दिया है।
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ताजा मामला शहर की बाणसागर कॉलोनी का है, जहाँ सामुदायिक भवन के आसपास और सार्वजनिक परिसरों में नशीली कफ सिरप की सैकड़ों खाली शीशियां बिखरी हुई मिली हैं। एक तरफ जहाँ जिला प्रशासन और पुलिस लगातार अवैध नशीले पदार्थों के कारोबार के खिलाफ अभियान चलाने का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ इस तरह खुलेआम सार्वजनिक स्थलों पर कफ सिरप की खाली शीशियों का अंबार लगना पुलिस गश्त और प्रशासनिक मुस्तैदी पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।
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क्या इतिहास और शिक्षा से हटकर बन रही है नशे की पहचान?
- रीवा को कभी विंध्य की शैक्षणिक और सांस्कृतिक राजधानी के रूप में जाना जाता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह से प्रतिबंधित नशीली सिरप (कफ सिरप) का अवैध काला कारोबार पनपा है, उसने युवा पीढ़ी के भविष्य को अंधकार में धकेल दिया है। स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्धजनों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर कड़ा नियंत्रण नहीं लगाया गया, तो यह कलंक शहर की युवा पीढ़ी को पूरी तरह खोखला कर देगा।
सवाल यह है कि आखिर पुलिस की तमाम चेकिंग और छापों के बावजूद तस्करों और नशे के सौदागरों के हौसले इतने बुलंद क्यों हैं? बाणसागर कॉलोनी जैसी पॉश और व्यस्त बस्तियों के पास इस तरह भारी मात्रा में खाली शीशियां का मिलना यह साबित करता है कि स्थानीय स्तर पर असामाजिक तत्वों का जमावड़ा बेखौफ जारी है। शहरवासियों ने अब जिला प्रशासन और पुलिस के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि इस कथित ‘कोरेक्स संस्कृति’ पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर कठोर और निर्णायक कार्रवाई की जाए


