इंदौर। Nishaanebaz.com-MP Indore High Court Mutual Divorce Relief: सहमति से तलाक (Mutual Consent Divorce) की राह देख रहे और लंबे समय से एक-दूसरे से अलग रह रहे पति-पत्नी को इंदौर हाईकोर्ट से बहुत बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए साफ किया है कि यदि पति-पत्नी के बीच सुलह और समझौते की सभी कोशिशें नाकाम हो चुकी हैं और रिश्ते में सुधार की कोई गुंजाइश नहीं बची है, तो कानून में निर्धारित 6 महीने की प्रतीक्षा अवधि (कूलिंग-ऑफ पीरियड) को माफ किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि जब रिश्ता व्यावहारिक रूप से पूरी तरह खत्म हो चुका हो, तो सिर्फ समयावधि पूरी कराने के नाम पर कानूनी प्रक्रिया को लंबा खींचना बिल्कुल उचित नहीं है।
यह महत्वपूर्ण फैसला आशुतोष नामक याचिकाकर्ता की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए आया है। मामले के अनुसार, फैमिली कोर्ट ने पति-पत्नी की आपसी सहमति से तलाक की अर्जी पर 6 महीने का इंतजार अनिवार्य बताते हुए याचिका खारिज कर दी थी और अगली सुनवाई के लिए अप्रैल 2027 की लंबी तारीख तय कर दी थी। इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी, जहां अदालत ने मामले की परिस्थितियों और दोनों पक्षों के रुख को देखते हुए फैमिली कोर्ट के आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया।
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हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों द्वारा दिए गए हालिया दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए फैमिली कोर्ट को इस आवेदन पर नए सिरे से विचार करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि यदि दोनों पक्षों के बीच विवाद सुलझने की कोई संभावना नहीं बची है और वे लंबे समय से अलग रह रहे हैं, तो 6 महीने के वैधानिक इंतजार को खत्म कर त्वरित न्याय दिया जाना चाहिए।
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हाईकोर्ट ने निर्देश जारी किया है कि निर्णय की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर फैमिली कोर्ट सुप्रीम कोर्ट के नज़ीरों के आलोक में याचिका पर नया फैसला सुनाए। इस निर्णय से उन अनगिनत जोड़ों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जो औपचारिकता और लंबी कानूनी प्रक्रियाओं के कारण लंबे समय तक अदालतों के चक्कर काटने को मजबूर होते हैं।






