Luxury ICE vs EV Trends : नई दिल्ली: देश के लग्जरी कार बाजार में पिछले कुछ महीनों से इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में गिरावट दर्ज की गई है। ऑटो इंडस्ट्री के विशेषज्ञों और प्रमुख कंपनियों के प्रमुखों का मानना है कि ‘टोटल कॉस्ट ऑफ ओनरशिप’ (TCO) के मामले में पारंपरिक पेट्रोल-डीजल इंजन वाली गाड़ियां अब ईवी की तुलना में अधिक किफायती साबित हो रही हैं।
GST 2.0: लग्जरी बाजार के लिए ‘गेम चेंजर’
सितंबर 2025 में लागू हुए GST 2.0 ने पारंपरिक लग्जरी कारों को काफी सस्ता कर दिया है।
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नई दरें: लग्जरी कारों और SUVs पर अब एक समान 40% GST (बिना किसी अतिरिक्त सेस के) लागू है। इससे पहले यह दर 28% GST + 15-22% सेस थी।
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असर: पारंपरिक इंजन वाली लग्जरी कारों की कीमतों में 6% से 10% तक की कमी आई है। उदाहरण के लिए, कुछ प्रीमियम मॉडल्स की कीमतों में ₹8 लाख से ₹30 लाख तक की भारी कटौती हुई है।
इंडस्ट्री लीडर्स की राय:
संतोष अय्यर (MD & CEO, मर्सिडीज-बेंज इंडिया): “अक्टूबर और नवंबर 2025 के आंकड़ों के अनुसार, लग्जरी सेगमेंट में ईवी की पैठ में 2 से 3 प्रतिशत की कमी आई है। पारंपरिक इंजन (ICE) वाहनों का TCO अब EV की तुलना में बेहतर है, जिससे ग्राहकों का रुझान फिर से पेट्रोल-डीजल कारों की ओर बढ़ा है।”
हरदीप सिंह बरार (प्रेसिडेंट & CEO, बीएमडब्ल्यू ग्रुप इंडिया): “GST 2.0 ने हमारे पारंपरिक इंजन वाले पोर्टफोलियो को और अधिक आकर्षक बना दिया है। हमने कीमतों में औसतन 6.7% की कटौती का लाभ ग्राहकों को दिया है। हालांकि, हम ईवी में भी भविष्य के लिए तैयार तकनीक और लो-रनिंग कॉस्ट के कारण निरंतर गति देख रहे हैं।”
प्रमुख कारण: क्यों घट रहा है EV का मोह?
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कीमत का अंतर कम होना: पारंपरिक लग्जरी कारों की कीमतों में गिरावट के कारण EV और ICE के बीच का ‘प्राइस गैप’ कम हो गया है।
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रीसेल वैल्यू: लग्जरी सेगमेंट में अभी भी पारंपरिक इंजन वाली पुरानी कारों की रीसेल वैल्यू बेहतर मानी जाती है।
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इंफ्रास्ट्रक्चर: चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौतियां अभी भी कुछ ग्राहकों को लंबी दूरी की यात्रा के लिए EV खरीदने से रोक रही हैं।











