Lucknow News : लखनऊ : लखनऊ में 29 लोगों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट, दुष्कर्म समेत अन्य धाराओं में झूठे मुकदमे दर्ज कराने और उन्हें जेल भेजने के मामले में अधिवक्ता परमानंद गुप्ता को दोषी करार दिया गया है। विशेष न्यायाधीश विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने परमानंद को उम्रकैद की सजा सुनाई और 5.10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।
Lucknow News : परमानंद गुप्ता पत्नी के ब्यूटी पार्लर में काम करने वाली पूजा रावत को बहला-फुसलाकर झूठे केस दर्ज कराने का सहारा लेता था। विभूतिखंड थाने में दर्ज एक दुष्कर्म के मामले की जांच एसीपी राधा रमण सिंह और विशेष लोक अभियोजक अरविंद मिश्रा ने की, जिसमें ठोस साक्ष्य और पैरवी के आधार पर अधिवक्ता को सजा मिली।
Lucknow News : दरअसल, परमानंद का अरविंद यादव और अवधेश यादव से संपत्ति विवाद चल रहा था। इसी रंजिश में उसने पूजा रावत को पीड़िता बताकर दोनों भाइयों पर रेप और एससी/एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज कराया। जांच में यह मुकदमा झूठा पाया गया। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, कॉल डिटेल और घटनास्थल की पड़ताल में कुछ भी आरोप सिद्ध नहीं हुआ। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि परमानंद ने खुद 18 और महिला के जरिए 11 फर्जी मुकदमे दर्ज कराए थे।
Lucknow News : सबसे अहम मोड़ तब आया जब कोर्ट में तलब किए जाने पर पूजा रावत ने बयान बदलते हुए कहा कि परमानंद और उसकी पत्नी ने उसे जाल में फंसाकर जबरन झूठे बयान दिलवाए। उसने अदालत को बताया कि न तो उसके साथ दुष्कर्म हुआ और न ही वह बताए गए स्थान पर कभी रही थी। उसने माफी मांगते हुए सच सामने रखा।
Lucknow News : अदालत ने अपने फैसले में कहा कि परमानंद गुप्ता जैसे लोग प्रैक्टिस करने योग्य नहीं हैं। फैसले की प्रति बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश को भेजने का आदेश भी दिया गया। वहीं, पूजा रावत को अदालत ने सशर्त माफी दे दी।
Lucknow News : जांच अधिकारी एसीपी राधा रमण सिंह ने बताया कि जब वे घटनास्थल पर पहुंचे तो वहां कमरा ही मौजूद नहीं था, केवल खाली प्लॉट मिला। कॉल डिटेल और गवाहों के बयान से भी यह साफ हो गया कि पूरा मामला परमानंद गुप्ता द्वारा रचा गया एक षड्यंत्र था।











