नई दिल्ली। Nishaanebaz.com-Heramba Sankashti Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी के महापर्व से पहले आने वाली संकष्टी चतुर्थी को धार्मिक दृष्टिकोण से बेहद खास माना जा रहा है। पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 31 अगस्त, दिन सोमवार को पड़ रही है। इस पावन तिथि पर भगवान श्री गणेश के अत्यंत दुर्लभ और शक्तिशाली ‘हेरंब’ स्वरूप की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। हेरंब गणपति को भगवान गणेश के 32 प्रमुख स्वरूपों में से एक माना जाता है, जिनकी उपासना से सभी प्रकार की बाधाएं और संकट तुरंत नष्ट हो जाते हैं।
पंचांगीय गणना के अनुसार भाद्रपद कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 31 अगस्त 2026 को सुबह 8:50 बजे से प्रारंभ होगी। संकष्टी चतुर्थी के व्रत में चंद्रोदय का विशेष महत्व होता है, क्योंकि चंद्रमा के दर्शन और उन्हें अर्घ्य देने के पश्चात ही यह व्रत पूर्ण माना जाता है। 31 अगस्त की रात चंद्रोदय का अनुमानित समय करीब 8:27 बजे रहेगा। व्रती पूरे दिन उपवास रखकर शाम को श्री गणेश जी का पूजन करेंगे और रात्रि में चंद्रमा को जल अर्पित करने के बाद ही व्रत का पारण करेंगे।
धार्मिक ग्रंथों और ब्रह्मवैवर्त पुराण के संदर्भों के अनुसार ‘हे’ का शाब्दिक अर्थ असहाय या कमजोर होता है, जबकि ‘रम्ब’ का अर्थ रक्षा करना होता है। इस प्रकार हेरंब गणपति का मूल अर्थ असहायों और कमजोरों की रक्षा करने वाले देवता से है। सामान्य गणेश प्रतिमाओं से अलग हेरंब गणपति का यह स्वरूप अत्यंत दिव्य है, जिसमें उनके पांच मुख और दस भुजाएं दर्शाई गई हैं। वे सिंह पर सवार होते हैं, जो निर्भयता, असीम शक्ति और सर्व समर्थता का प्रतीक है। उनकी दस भुजाएं साधक को सुरक्षा और सभी बाधाओं से मुक्ति प्रदान करने का सामर्थ्य रखती हैं।
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पौराणिक मान्यताओं और कथाओं के अनुसार हेरंब गणपति की पूजा व्यक्ति को सबसे कठिन परिस्थितियों से उबारने का फल प्रदान करती है। द्रिक पंचांग में उल्लेखित कथा के अनुसार, महर्षि शरभंग के मार्गदर्शन में रानी दमयंती ने हेरंब संकष्टी का कठिन व्रत किया था, जिसके शुभ प्रभाव से उन्हें अपने खोए हुए पति राजा नल की पुनः प्राप्ति हुई थी। पूजा के दौरान भगवान श्री गणेश को दूर्वा, मोदक, फल और लाल फूल अर्पित करने का विधान है। कठिन से कठिन दौर से गुजर रहे श्रद्धालुओं के लिए यह व्रत आशा, संरक्षण और विघ्नहर्ता के आशीर्वाद का अचूक माध्यम माना जाता है।





