पटना। Nishaanebaz.com-Chirag Paswan And Jitan Ram Manjhi Conflict: अनुसूचित जाति (SC) आरक्षण के भीतर सबसे वंचित वर्गों के लिए अलग उप-श्रेणी यानी ‘कोटे के अंदर कोटा’ बनाने के मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के बीच राजनीतिक मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और हाजीपुर सांसद चिराग पासवान ने उप-श्रेणी के निर्माण को दलित समुदाय को बांटने वाला कदम बताया है। वहीं दूसरी ओर, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के प्रमुख व गया सांसद जीतन राम मांझी ने इसे अत्यंत पिछड़े व वंचित दलित वर्गों के उत्थान के लिए अनिवार्य करार दिया है।
मामला उस समय तूल पकड़ गया जब पत्रकारों ने चिराग पासवान से जीतन राम मांझी और उनके बेटे संतोष कुमार सुमन द्वारा उप-कोटा के समर्थन पर सवाल पूछा। चिराग पासवान ने कहा कि अनुसूचित जाति के भीतर अलग उप-वर्ग बनाने से समाज में सामाजिक विभाजन पैदा होगा और इसके स्थान पर केवल क्रीमी लेयर की अवधारणा पर विचार होना चाहिए। चिराग ने आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि जो लोग इस व्यवस्था का समर्थन कर रहे हैं, उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। चिराग का यह रुख उनके दिवंगत पिता रामविलास पासवान की उस राजनीति के अनुरूप है, जिन्होंने बिहार में नीतीश कुमार द्वारा बनाई गई ‘महादलित’ श्रेणी का कड़ा विरोध किया था।
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चिराग पासवान के बयान पर पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने जोरदार पलटवार करते हुए कहा कि यदि इस्तीफे की बात हो रही है, तो इस्तीफा चिराग पासवान को देना चाहिए। मांझी का तर्क है कि चिराग उस वास्तविक स्थिति को नहीं समझ पा रहे हैं, जिसे वे और उनके बेटे दलितों के व्यापक हित में उठा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि दलित समाज के भीतर मुसहर, भुइयां, नट और डोम जैसी कुछ अत्यंत कमजोर जातियां हैं, जिन्हें मुख्यधारा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उनके अनुसार, उप-श्रेणी लागू होने से इन सभी बेहद पिछड़ी जातियों तक सरकारी योजनाओं और आरक्षण का वास्तविक लाभ पहुंचेगा।
इस पूरे घटनाक्रम पर जीतन राम मांझी के बेटे और बिहार सरकार में मंत्री संतोष कुमार सुमन ने भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर चिराग को ‘छोटा भाई’ बताते हुए कहा कि चिराग की पार्टी बड़ी है और संसद तथा बिहार विधानसभा में उनके पास अधिक संख्या बल है। उन्होंने कहा कि यदि चिराग नेतृत्व करें, तो वे भी साथ इस्तीफा देने को तैयार हैं। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि ‘कोटे के अंदर कोटा’ और ‘क्रीमी लेयर’ दो बिल्कुल अलग-अलग मुद्दे हैं। वे न तो आरक्षण के खिलाफ हैं और न ही क्रीमी लेयर लागू करने के पक्ष में हैं, बल्कि केवल अति-वंचित दलित जातियों के लिए न्यायसंगत अधिकारों की मांग कर रहे हैं।





