Tribal Land Fraud :गौरी शंकर गुप्ता/पत्थलगांव (जशपुर)। इंसान अपनी मेहनत से किस्मत बदल सकता है, लेकिन जशपुर के पत्थलगांव में एक ऐसा मामला सामने आया है जहाँ एक व्यक्ति ने न केवल अपनी जाति बदल ली, बल्कि आदिवासियों के लिए बने सख्त कानूनों को धता बताते हुए जमीनों का स्वरूप भी बदल दिया। स्वतंत्र पत्रकार ऋषिकेश मिश्रा की शिकायत ने नरेश कुमार सिदार (पिता अजब सिंह सिदार) के उस भू-साम्राज्य का पर्दाफाश किया है, जिसकी शिकायत अब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक पहुँच चुकी है।
जाति बदलने का ‘हुनर’: शिकायत के अनुसार, नरेश सिदार ने दस्तावेजों के साथ गजब की हेराफेरी की है। पालीडीह और पत्थलगांव के अधिकांश कागजों में उन्हें ‘गोंड’ जनजाति का बताया गया है, लेकिन खसरा नंबर 513/85/ख की फाइलों में वे अचानक ‘उरांव’ बन गए। सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह महज प्रशासनिक चूक है या सोची-समझी साजिश?
डायवर्जन और बैंक लेनदेन पर सवाल: आदिवासियों की कृषि भूमि को कमर्शियल (वाणिज्यिक) घोषित करने के लिए बेहद कड़े नियम हैं, लेकिन नरेश सिदार के मामले में खसरा नंबर 513/15/क/5 और 513/24/क जैसी कई जमीनों को धड़ल्ले से डायवर्ट किया गया। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि 28 अगस्त 2025 को रायगढ़ स्थित HDFC बैंक में इन ‘कमर्शियल’ जमीनों को बंधक रखकर करोड़ों के वित्तीय लेनदेन की आशंका जताई गई है।
प्रशासनिक जाँच की माँग: पत्रकार ऋषिकेश मिश्रा ने इस पूरे ‘खसरा-तंत्र’ की जाँच के लिए कमिश्नर, आईजी और एसडीएम को दस्तावेज सौंपे हैं। जाँच की मुख्य माँग यह है कि नामांतरण और डायवर्जन की प्रक्रियाओं की सूक्ष्मता से जाँच हो और यह स्पष्ट किया जाए कि आरोपी वास्तव में किस जनजाति का है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस ‘अजब-गजब’ फर्जीवाड़े पर क्या कार्रवाई करता है।













