कोरबा, छत्तीसगढ़: Korba News : छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक लापरवाही का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पहले रायगढ़ में एक मृत व्यक्ति को जिला बदर करने के आदेश के बाद अब कोरबा में ऐसा ही एक और वाकया हुआ है। पुलिस एक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार करने उसके घर पहुंची, जिसका 18 महीने पहले ही निधन हो चुका था। यह घटना पुलिस और न्यायिक प्रक्रियाओं की गंभीर चूक को उजागर करती है।
Korba News : मृत्यु के बाद कोर्ट में हाजिर न होने पर वारंट जारी
यह मामला दिलीप दुबे नामक शख्स से जुड़ा है, जिनका 31 जनवरी 2024 को निधन हो गया था। इसके बावजूद, 19 सितंबर 2025 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने उनके नाम से गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया। वारंट में दिलीप दुबे को एक मामले में गवाह के रूप में अदालत में पेश न होने के कारण गिरफ्तार करने का आदेश दिया गया था।
परिवार सदमे में, पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल
जब पुलिस दिलीप दुबे को गिरफ्तार करने के लिए उनके घर पहुंची, तो परिवार वाले यह देखकर हैरान रह गए। परिजनों का कहना है कि पुलिस ने इस मामले में उन्हें कभी भी समन नहीं भेजा और सीधे गिरफ्तारी वारंट लेकर उनके घर आ गई। यह मामला तब का है जब एक युवक ने उनके बेटे के साथ मारपीट की थी, जिसकी रिपोर्ट रामपुर पुलिस चौकी में दर्ज की गई थी। इस मामले में पुलिस ने दिलीप दुबे और उनकी पत्नी को गवाह बनाया था। अब, यह मृत व्यक्ति का गिरफ्तारी वारंट रद्द करवाने के लिए परिवार न्यायालय के चक्कर लगा रहा है।
लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल
यह घटना पुलिस और न्यायिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े करती है। यह समझ से परे है कि वारंट जारी करने से पहले व्यक्ति की स्थिति की जांच क्यों नहीं की गई। इस तरह की गंभीर गलतियां स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं कि पुलिस और न्यायिक रिकॉर्ड्स को अपडेट करने की प्रक्रिया में बड़ी कमी है, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। फिलहाल इस मामले पर किसी भी अधिकारी का कोई बयान नहीं आया है।











