Kendriya Vidyalayas students : नई दिल्ली। केंद्रीय विद्यालयों में नए छात्रों के नामांकन को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने लोकसभा में जो आंकड़े पेश किए हैं, वे चिंता पैदा करने वाले हैं। केंद्रीय विद्यालयों को लंबे समय से सरकारी स्कूलों में एक आदर्श मॉडल माना जाता रहा है — जहां न सिर्फ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलती है बल्कि परिणाम भी बेहतरीन रहते हैं। लेकिन अब आंकड़े इशारा कर रहे हैं कि छात्रों और अभिभावकों का झुकाव इन स्कूलों से कम होता जा रहा है।
Kendriya Vidyalayas students : क्या है मामला
Kendriya Vidyalayas students : लोकसभा में सांसदों बीके पार्थसारथी और सुधा आर द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में शिक्षा मंत्री ने बताया कि केंद्रीय विद्यालयों में नए नामांकन की संख्या में बीते पांच वर्षों में गिरावट आई है।
Kendriya Vidyalayas students : 2020-21 में 1.95 लाख नए नामांकन हुए थे, जो 2021-22 में घटकर 1.83 लाख और 2022-23 में 1.58 लाख रह गए। हालांकि 2023-24 में यह संख्या थोड़ी बढ़कर 1.75 लाख हो गई, लेकिन 2024-25 में यह फिर गिरकर सिर्फ 1.39 लाख रह गई है — जो पांच सालों का सबसे निचला स्तर है।
Kendriya Vidyalayas students : कुल छात्र संख्या में भी गिरावट
Kendriya Vidyalayas students : केवल नए नामांकन ही नहीं, बल्कि स्कूलों में कुल पंजीकृत छात्रों की संख्या भी घटी है। 2020-21 में केंद्रीय विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या 13.88 लाख थी, जो 2024-25 में घटकर 13.5 लाख हो गई है।
Kendriya Vidyalayas students : नई पहल: 85 नए केंद्रीय विद्यालयों की घोषणा
Kendriya Vidyalayas students : यह गिरावट ऐसे समय में दर्ज की गई है जब केंद्र सरकार ने देशभर में 85 नए केंद्रीय विद्यालय खोलने की मंजूरी दी है। इसके साथ ही कर्नाटक के शिवमोग्गा स्थित एक मौजूदा विद्यालय में विस्तार का भी फैसला लिया गया है। इन नए स्कूलों और विस्तार परियोजना पर कुल 5,872.08 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
Kendriya Vidyalayas students : बजट में बढ़ोतरी के बावजूद गिरावट
Kendriya Vidyalayas students : शिक्षा मंत्री के अनुसार, केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) को मिलने वाली राशि में हर साल बढ़ोतरी हुई है। 2020-21 में जहां 6,437.68 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, वहीं 2024-25 में यह राशि बढ़कर 8,727 करोड़ रुपये हो गई है। इसके बावजूद नामांकन में गिरावट, नीति निर्माताओं के लिए एक गंभीर संकेत है।
Kendriya Vidyalayas students : नामांकन घटने के कारणों की तलाश
Kendriya Vidyalayas students : शिक्षा मंत्रालय पहले ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से इस गिरावट के कारणों की जानकारी माँग चुका है। इस साल की शुरुआत में आयोजित एक बैठक में मंत्रालय ने 23 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में सरकारी स्कूलों में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर नामांकन घटने पर चिंता जताई थी और विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था।
Kendriya Vidyalayas students : केंद्रीय विद्यालयों को लेकर छात्रों के घटते रुझान की यह प्रवृत्ति शिक्षा व्यवस्था के लिए एक चेतावनी है। एक ओर सरकार अधिक विद्यालय खोलने और बजट बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है, वहीं दूसरी ओर छात्रों की घटती उपस्थिति इस बात की ओर इशारा करती है कि बुनियादी स्तर पर कहीं कुछ कमी ज़रूर है — चाहे वह प्रतिस्पर्धी विकल्पों का उभार हो, या विद्यालयों में व्यवस्थागत गिरावट। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि मंत्रालय इस प्रवृत्ति को कैसे पलटता है।













