Karur stampede case : नई दिल्ली। तमिलनाडु के करूर में 27 सितंबर को हुई भीषण भगदड़ के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट की कार्यप्रणाली पर सख्त टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट को देखने के बाद आश्चर्य व्यक्त किया और टिप्पणी की कि “मद्रास हाईकोर्ट में कुछ गड़बड़ है।” जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने हाईकोर्ट की न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अपने पहले के उस फैसले में संशोधन करने से इनकार कर दिया, जिसके तहत सीबीआई जाँच का आदेश दिया गया था।
Karur stampede case : करूर भगदड़ का घटनाक्रम
यह पूरा मामला 27 सितंबर को तब शुरू हुआ जब टीवीके (TVK) की राज्यव्यापी यात्रा के दौरान करूर में एक रैली आयोजित की गई।
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भीड़ प्रबंधन में चूक: रैली स्थल की क्षमता मात्र 2,000-3,000 लोगों की थी, लेकिन वहाँ लगभग 30,000 लोग जमा हो गए।
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हादसा: सुबह से इंतजार कर रही अनियंत्रित भीड़ दोपहर में भगदड़ का शिकार हो गई।
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क्षति: इस दुर्घटना में 41 लोगों की मौत हो गई और 60 से अधिक लोग घायल हुए। मृतकों में ज्यादातर बच्चे और महिलाएँ थीं।

Karur stampede case : विजय सेतुपति की सहायता और कानूनी विवाद
भगदड़ के बाद, टीवीके नेता विजय सेतुपति ने पीड़ितों के प्रति दुख व्यक्त किया। उन्होंने प्रत्येक मृतक के परिवार को 20 लाख रुपये और घायलों को 2 लाख रुपये की सहायता की घोषणा की। उन्होंने वीडियो कॉल के माध्यम से परिवारों से बात की और ‘न्याय’ का आश्वासन दिया।
हालांकि, पुलिस ने टीवीके कार्यकर्ताओं पर लापरवाही, भीड़ प्रबंधन में कमी और हत्या के प्रयास के आरोप लगाए। विजय सेतुपति को नामजद नहीं किया गया, लेकिन मद्रास हाईकोर्ट ने उन पर जिम्मेदारी से भागने का आरोप लगाया था।
Karur stampede case : हाईकोर्ट की विवादास्पद टिप्पणी और सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप
यह मामला मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच में पहुँचा, जिसने बीजेपी नेता उमा आनंदन की सीबीआई जाँच की याचिका को खारिज कर दिया।
इसके विपरीत, चेन्नई बेंच के सिंगल जज की पीठ ने 3 अक्टूबर को SIT (विशेष जाँच दल) जाँच का आदेश दिया। इस आदेश में विजय और टीवीके पर यह कहते हुए कटाक्ष किया गया कि वे घटनास्थल छोड़कर भाग गए और कोई पछतावा नहीं दिखाया, जिसे बेंच ने “राष्ट्र की अंतरात्मा को झकझोरने वाला” बताया।
विजय सेतुपति ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और कहा कि यह टिप्पणी उन्हें बिना सुनवाई का मौका दिए की गई है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला:
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CBI जाँच: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर, 13 अक्टूबर को मामले में सीबीआई जाँच बैठाई गई, जिसकी निगरानी रिटायर्ड जस्टिस अजय रस्तोगी कर रहे थे।
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संवेदनशीलता पर सवाल: सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई में कहा कि हाईकोर्ट का तरीका संवेदनशीलता और उचितता की कमी दर्शाता है।
Karur stampede case : हाईकोर्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल की रिपोर्ट के आधार पर मद्रास हाईकोर्ट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए:
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अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन: बेंच ने कहा कि चेन्नई बेंच ने रैली SOP की याचिका पर SIT का आदेश दिया, जो उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर था।
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दोहराव: मदुरै बेंच के फैसले के बाद भी उसी मुद्दे पर चेन्नई बेंच द्वारा दोहराव क्यों किया गया?
Karur stampede case : सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को रजिस्ट्रार जनरल की रिपोर्ट साझा करने और इस पर जवाब देने का निर्देश दिया है। तमिलनाडु सरकार ने सीबीआई जाँच को राज्य की स्वायत्तता का उल्लंघन बताते हुए सुप्रीम कोर्ट से इसे रद्द करने की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।











