जम्मू-कश्मीर। Jammu And Kashmir : डोडा जिले की घाटियों में मंगलवार को एक और दिल दहला देने वाला हादसा हुआ जब एक तेज़ रफ्तार टेंपो अचानक नियंत्रण खोकर गहरी खाई में जा गिरा। इस हादसे में 5 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 19 लोग घायल हो गए। घायलों में तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है। गंभीर रूप से घायल एक 5 वर्षीय बच्ची उज्मा जान को जम्मू रेफर किया गया है।
Jammu And Kashmir : कैसे हुआ हादसा?
हादसा डोडा-भर्थ रोड पर पोंडा के समीप उस वक्त हुआ, जब टेंपो चालक एक तीव्र मोड़ पर नियंत्रण नहीं रख सका। स्थानीय लोगों के अनुसार, वाहन अधिक भरा हुआ था और अचानक तेज़ आवाज़ आई – उसके बाद सबकुछ अंधेरा हो गया। एएनआई से बात करते हुए एक घायल परवेज ने बताया, “गाड़ी पूरी तरह भरी हुई थी। क्या हुआ पता नहीं चला। आवाज आई और सब खत्म।”
स्थानीयों ने संभाला मोर्चा
हादसे के बाद सबसे पहले स्थानीय ग्रामीण मौके पर पहुंचे। खाई में गिरे घायलों को किसी तरह बाहर निकाला गया। उसके बाद पुलिस और आपदा राहत बल ने बचाव अभियान शुरू किया। घायलों को नज़दीकी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।
पहले भी बन चुका है ‘हादसों का हॉटस्पॉट’
डोडा-भर्थ रोड अब “एक्सीडेंट जोन” के नाम से बदनाम हो चुका है। यह पहली बार नहीं जब यहां ऐसा जानलेवा हादसा हुआ हो। वर्ष 2023 में इसी क्षेत्र में बस हादसे में 37 लोगों की मौत हुई थी। इससे पहले 2021 में भी 10 लोगों की जान जा चुकी है। लगातार हो रही दुर्घटनाओं ने प्रशासन की लचर सड़क सुरक्षा नीति और खतरनाक सड़कों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Jammu And Kashmir
मृतकों की पहचान
इस हादसे में जिन लोगों ने जान गंवाई, उनमें शामिल हैं:
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मोहम्मद अशरफ (35)
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मंगता वानी (51)
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अत्ता मोहम्मद (33)
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तालिब हुसैन (35)
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रफीका बेगम (60)
प्रशासन और नेताओं ने जताया दुख
जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने ट्वीट कर हादसे पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने लिखा – “डोडा में हुए सड़क हादसे से व्यथित हूं। दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।”
वहीं केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने डोडा के डिप्टी कमिश्नर हरविंदर सिंह से बात कर हरसंभव मदद और चिकित्सकीय सुविधा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
अब सवाल उठता है – कब सुधरेंगी पहाड़ी सड़कों की हालत?
डोडा जैसी दुर्गम और संवेदनशील जगहों पर लगातार हो रहे सड़क हादसे ये दिखाते हैं कि सुरक्षित यात्रा की उम्मीद अब भी अधूरी है। खराब सड़कें, ओवरलोडिंग और चालक की लापरवाही जैसे कारणों को नजरअंदाज करना अब भारी पड़ रहा है।
जरूरत है दीर्घकालिक समाधान की।
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सड़क चौड़ीकरण और बैरियर की व्यवस्था
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ड्राइवर ट्रेनिंग और फिटनेस जांच
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ओवरलोडिंग पर सख्त नियम लागू करना
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हाई रिस्क ज़ोन को चिन्हित कर वैकल्पिक मार्ग तैयार करना
वरना डोडा जैसी घटनाएं एक रूटीन बन जाएंगी — और खो जाने वाले हर जीवन के पीछे केवल अफसोस और बयानबाज़ी ही रह जाएगी।





