इजरायल : इजरायल ने यमन की राजधानी सना पर एयर स्ट्राइक्स करके ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के हवाई हमलों का जवाब दिया है। रविवार को सना के ज्यादातर रिहायशी इलाकों में धमाके की आवाज़ सुनाई दी। हूती मीडिया कार्यालय ने दावा किया कि इजरायल के स्ट्राइक में कई महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिनमें हेज़्याज़ बिजली संयंत्र और एक गैस स्टेशन शामिल हैं।
इजरायल की सेना ने बयान में कहा कि हवाई हमलों में राष्ट्रपति भवन, दो बिजली संयंत्र और एक ईंधन भंडारण स्थल को निशाना बनाया गया। यह हमला हूती आतंकियों के खिलाफ किया गया, जिन्होंने बीते सप्ताह इजरायल के खिलाफ सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलें और यूएवी हमले किए थे।
स्थानीय मीडिया के अनुसार, इस हवाई हमले में दो लोगों की मौत हुई और पांच से अधिक घायल हुए। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।
धमाकों से दहला सना
राजधानी सना के लोग बताते हैं कि पूरे शहर में जोरदार धमाके सुनाई दिए। राष्ट्रपति भवन और एक बंद सैन्य अकादमी के पास विस्फोट भी हुए। राजधानी के साबिक चौक के पास धुएं के गुबार उठते भी देखे गए।
एक निवासी ने मीडिया को बताया, “धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि इसे दूर से भी सुना जा सकता था। घर हिल गया और खिड़कियां टूट गईं।”
लाल सागर में तनाव
फिलिस्तीनियों के साथ संघर्ष के बाद लाल सागर में इजरायल के व्यापारिक नुकसान को देखते हुए हूती विद्रोहियों ने इजरायल से जुड़े जहाजों पर लगातार ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं।
बीते दो सालों में हूती विद्रोहियों ने 100 से ज़्यादा जहाजों को निशाना बनाया। इस रास्ते से हर साल लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर का सामान गुजरता है।
अमेरिका और हूती समझौता
बीते साल मई में अमेरिका और हूती विद्रोहियों के बीच समझौता हुआ था। इसके तहत हूती विद्रोही लाल सागर में हमला रोकेंगे और बदले में अमेरिका हवाई हमले बंद करेगा। हालांकि, हूती ने कहा कि वह इजरायल से जुड़े ठिकानों पर हमला जारी रखेंगे।
हूती विद्रोही और इजरायल के रिश्ते
हूती विद्रोही, जिन्हें अंसार अल्लाह भी कहा जाता है, यमन में सक्रिय एक शिया ज़ैदी आंदोलन है। उनका नारा रहा है: “मौत इजरायल को।” हूती विद्रोहियों को ईरान का महत्वपूर्ण समर्थन प्राप्त है।
वे खुद को “अक्ष-अ-रजिस्टेंस” का हिस्सा मानते हैं, जिसमें ईरान, इराकी मिलिशिया, हिज़बुल्लाह और हमास शामिल हैं। हूती विद्रोहियों ने 2023 से इजरायल पर लगातार हाईपरसोनिक मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं, जिससे कई सैन्य ठिकानों, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और बंदरगाहों को नुकसान पहुंचा।











