निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अजयपाल शर्मा की तैनाती को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। उन्हें चुनावी पर्यवेक्षक बनाए जाने के बाद उनका एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद विपक्षी दलों ने इसे बड़ा मुद्दा बना लिया है।
वायरल वीडियो पर विपक्ष का हमला
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस मामले को लेकर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि एक वरिष्ठ अधिकारी का कथित अभद्र वीडियो सार्वजनिक होना शासन-प्रशासन की छवि को नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग भी उठाई।
बंगाल चुनाव के दौरान ऑब्ज़र्वर बने, उप्र के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का जो अभद्र वीडियो सरेआम चल रहा है, उससे उत्तर प्रदेश सरकार के शासन-प्रशासन की छवि बेहद क्षतिग्रस्त हुई है साथ ही भाजपा सरकार के तथाकथित ‘महिला सम्मान’ व ‘नारी वंदन’ के दावों की पोल भी महिलाओं के सामने पूरी तरह…
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) April 28, 2026
‘महिला सुरक्षा’ पर उठे सवाल
अखिलेश यादव ने अपने बयान में महिला सुरक्षा के मुद्दे को भी जोड़ा। उनका कहना है कि जब जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारियों पर ही सवाल उठते हैं, तो आम महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में की गई कार्रवाई से सरकार का रुख स्पष्ट होगा।
महुआ मोइत्रा का तंज
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी अजयपाल शर्मा पर कटाक्ष करते हुए उन्हें “फेयर एंड लवली बबुआ” कहा। उन्होंने सोशल मीडिया पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए कहा कि अधिकारी को “कूल” रहना चाहिए। उनका यह बयान भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है।
पर्यवेक्षक नियुक्ति पर भी सवाल
इससे पहले भी विपक्ष ने आरोप लगाया था कि चुनाव के दौरान पर्यवेक्षक के नाम पर राजनीतिक रूप से पक्षपातपूर्ण नियुक्तियां की जा रही हैं। अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए कहा था कि कुछ राज्यों से “परीक्षित अधिकारियों” को भेजा जा रहा है, लेकिन इससे चुनावी नतीजों पर असर नहीं पड़ेगा।
TMC का आरोप
तृणमूल कांग्रेस ने अपने बयान में अजयपाल शर्मा को उत्तर प्रदेश का “एनकाउंटर एक्सपर्ट” बताते हुए उनकी नियुक्ति पर सवाल उठाए। पार्टी का कहना है कि ऐसे अधिकारियों की तैनाती निष्पक्ष चुनाव की भावना पर सवाल खड़े करती है।
आगे क्या?
फिलहाल इस पूरे मामले में आधिकारिक स्तर पर कोई बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि चुनाव आयोग इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है और क्या किसी तरह की जांच या कार्रवाई होती है।











