कटनी : कटनी में अल्प प्रवास पर पहुंचे मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार का दौरा अब केवल शिक्षा सुधारों की घोषणाओं तक सीमित नहीं रहा। पत्रकारों के सवालों पर उनके विवादित और असहज बयानों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी।
UGC और संवेदनशील सवालों पर मंत्री की चुप्पी
जब मंत्री से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) से जुड़े विवाद, शंकराचार्य विवाद और पीपीपी मॉडल मेडिकल कॉलेज जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सवाल किए गए, तो मंत्री परमार ने जवाब देने से साफ इंकार कर दिया। उन्होंने वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गी के संदर्भ में तंज कसते हुए कहा, “मैं कैलाश विजयवर्गी नहीं हूं। कुछ विषयों पर मैं जवाब नहीं दे सकता।” इस बयान ने कटनी दौरे को राजनीतिक दृष्टि से भी चर्चा का विषय बना दिया।
नई शिक्षा नीति और डिजिटल वैल्यूएशन पर जोर
मंत्री परमार ने दौरे में प्रदेश के विश्वविद्यालयों में डिजिटल मूल्यांकन (Digital Valuation) सिस्टम लागू करने की योजना की जानकारी दी। इसके तहत अब उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन ऑफलाइन नहीं बल्कि ऑनलाइन किया जाएगा, जिससे परीक्षा प्रक्रिया में तेजी और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। उन्होंने अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति, बहुभाषीय शिक्षा और अन्य सुधारों को उपलब्धियों के तौर पर पेश किया।
सियासी हलचल और स्थानीय प्रतिक्रिया
मंत्री की चुप्पी और विवादित बयान के कारण मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। कटनी के स्थानीय पत्रकारों और नागरिकों ने इसे मंत्री की जिम्मेदारी से बचने का संकेत बताया। वहीं, शिक्षा सुधारों की घोषणाएं प्रशासनिक दृष्टि से सकारात्मक मानी जा रही हैं, लेकिन संवेदनशील सवालों पर जवाब टालने के कारण यह दौरा विवादित बन गया।











