Indore Contaminated Water Deaths : भोपाल: मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों और किसानों की दुर्दशा को लेकर मोहन सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। भोपाल में मीडिया से चर्चा करते हुए पटवारी ने कहा कि इंदौर की जनता आज भाजपा के अहंकार और कुप्रबंधन की सजा भुगत रही है। उन्होंने कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के इस्तीफे की मांग करते हुए साफ किया कि कांग्रेस मौतों पर सियासत नहीं, बल्कि पीड़ितों के लिए न्याय चाहती है।
पटवारी ने इंदौर नगर निगम और प्रशासन को घेरते हुए कहा कि 22-24 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी शहर को जहरीला पानी मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रति व्यक्ति 10 हजार रुपये का बजट होने के बावजूद शुद्ध पेयजल जैसा मौलिक अधिकार जनता को नहीं मिल रहा। इंदौर की त्रासदी को नर्सिंग घोटाले जैसा बताते हुए उन्होंने कहा कि मौतें हो रही हैं लेकिन जिम्मेदार नेता मौन हैं। इस अन्याय के खिलाफ कांग्रेस 11 जनवरी को इंदौर में विशाल ‘न्याय मार्च’ निकालेगी, जिसमें मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित कर सरकार को जवाब दिया जाएगा।
प्रशासनिक कार्रवाई पर तंज कसते हुए जीतू पटवारी ने एसडीएम के सस्पेंशन को सरकार की तानाशाही बताया। उन्होंने कहा कि गलती सरकार की नीतियों की है, लेकिन सजा अधिकारियों और आवाज उठाने वालों को दी जा रही है। पटवारी ने यह भी जानकारी दी कि इंदौर की घटना से राहुल गांधी को अवगत करा दिया गया है और उनके आने का निर्णय एआईसीसी कार्यालय करेगा। उन्होंने प्रशासन पर कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को पीड़ित परिवारों से मिलने से रोकने का भी गंभीर आरोप लगाया।
सरकार की आर्थिक स्थिति पर सवाल उठाते हुए पीसीसी चीफ ने कहा कि प्रदेश 5000 करोड़ के कर्ज में डूबा है और सरकार ने अब तक 1100 संपत्तियां बेच दी हैं। मुख्यमंत्री की आर्थिक समझ पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि आय बढ़ाने के बजाय भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। मनरेगा का नाम बदलने पर उन्होंने तंज कसा कि नाम बदलने से योजनाएं नहीं चलतीं, फंड देने की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा में राज्य का 40 प्रतिशत हिस्सा नहीं दिया जा रहा है।
अंत में किसानों के मुद्दे पर खुद को किसान पुत्र बताते हुए पटवारी ने कहा कि धान, गेहूं, सोयाबीन और प्याज की कीमतों में गिरावट से किसान कर्ज के दलदल में धंस गया है। भाजपा ने किसानों से जो वादे किए थे, वे पूरी तरह झूठे निकले। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसानों के साथ न्याय नहीं हुआ, तो कांग्रेस सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करेगी। संगठन की मजबूती के लिए वार्ड, ब्लॉक और पंचायत स्तर पर शुरू किए गए ‘कांग्रेस पंचायत’ कार्यक्रम को उन्होंने प्रदेश की राजनीति में बदलाव की नींव करार दिया।











