नई दिल्ली : एक बड़ी खबर के अनुसारअमेरिकी के पूर्व खुफिया अधिकारी रिचर्ड बार्लो ने हाल ही में खुलासा किया कि 1980 के दशक में भारत और इजराइल ने मिलकर पाकिस्तान के कहुटा परमाणु संयंत्र पर हवाई हमला करने की योजना बनाई थी। हालांकि, तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस हमले की अनुमति नहीं दी। बार्लो ने इस फैसले को “शर्मनाक” बताया और कहा कि अगर यह हमला होता, तो पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम को बड़ा झटका लगता।
योजना का मकसद
पूर्व CIA अधिकारी बार्लो के अनुसार इस गुप्त योजना का उद्देश्य पाकिस्तान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना और ईरान को परमाणु तकनीक देने से रोकना था। उस समय पाकिस्तान अपनी गुप्त परमाणु गतिविधियों को तेज कर रहा था। तमाम डिक्लासिफाइड दस्तावेज़ इस योजना की पुष्टि करते हैं।
भारत ने दिखाई ताकत
भारत ने 18 मई 1974 को अपने पहले परमाणु परीक्षण “ऑपरेशन स्माइलिंग बुद्धा” के जरिए यह संदेश दिया कि वह अब एक परमाणु शक्ति संपन्न देश बन चुका है। अमेरिकी खुफिया दस्तावेज़ बताते हैं कि भारत की यह क्षमता 1970 के दशक की शुरुआत में ही विकसित हो चुकी थी। इस कदम ने पाकिस्तान के लिए रणनीतिक चुनौती पैदा कर दी।
पाकिस्तान का परमाणु अभियान
भारत की सफलता के बाद पाकिस्तान ने अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को तेज किया। 1956 में एटॉमिक एनर्जी कमीशन की स्थापना और अमेरिका के “Atoms for Peace” कार्यक्रम में भागीदारी ने प्रारंभिक तकनीकी मार्ग प्रदान किया। 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद जुल्फिकार अली भुट्टो ने कहा कि भारत बम बनाए तो पाकिस्तान भूखा भी रहेगा, लेकिन अपना बम विकसित करना होगा।
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अफगानिस्तान संकट और रणनीतिक बदलाव
दिसंबर 1979 में सोवियत संघ का अफगानिस्तान पर हमला पाकिस्तान के लिए अवसर बन गया। अमेरिका ने पाकिस्तान को सहयोगी के रूप में अपनाया और परमाणु कार्यक्रम पर निगरानी में ढील दी। इससे पाकिस्तान को अपने गुप्त परमाणु प्रयास तेज करने का मौका मिला।
कहुटा प्लांट और परमाणु तनाव
1980 के दशक में भारत और इजराइल ने पाकिस्तान के कहुटा यूरेनियम संवर्धन संयंत्र पर हवाई हमला करने की योजना बनाई। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने इसे रोक दिया। यदि यह हमला सफल होता, तो पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम को गंभीर क्षति पहुंचती।
1998: पाकिस्तान भी परमाणु शक्ति बना
भारत के 1998 के परमाणु परीक्षण के तुरंत बाद पाकिस्तान ने भी परीक्षण कर अपनी स्थिति को दक्षिण एशिया का परमाणु शक्ति संपन्न देश घोषित किया। इस कदम ने क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन को बदल दिया और भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव को बढ़ा दिया।
भारत ने खोया अवसर
सीआईए के पूर्व अधिकारी रिचर्ड बार्लो के अनुसार कहुटा प्लांट पर हमला न होने के कारण पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम लगातार विकसित हुआ। उनका कहना है कि यह एक “बड़ा मौका” था जो हाथ से निकल गया और जिसके नतीजे आज भी क्षेत्रीय सुरक्षा पर महसूस किए जा सकते हैं।
इस तरह देखा जाए तो भारत और पाकिस्तान की परमाणु शक्ति प्रतिस्पर्धा ने दक्षिण एशिया की सुरक्षा पर आज एक गहरा प्रभाव डाला है। भारत की अग्रिम क्षमता और पाकिस्तान की प्रतिक्रिया ने यह साबित किया कि क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीतिक घटनाएं परमाणु रणनीति पर सीधे असर डालती हैं।











