नैनीताल: IFS अधिकारी संजीव चतुर्वेदी से जुड़े अवमानना मामले में नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। इस मामले में अब तक 15 न्यायाधीशों ने खुद को सुनवाई से अलग किया है, जो देश के न्यायिक इतिहास में नया रिकॉर्ड है।
हाल ही में न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी ने भी सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। चतुर्वेदी की याचिका में केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) के सदस्यों द्वारा स्थगन आदेश की अवहेलना करने का आरोप था।
Read More : CG News : ‘शाइनिंग फेस ऑफ द इवनिंग’ अवॉर्ड से सम्मानित हुए शाश्वत (राहुल) शर्मा
विशेषज्ञों के अनुसार लगातार हो रहे रिक्यूजल्स इस मामले की संवेदनशीलता और जटिलता को दर्शाते हैं। इससे पहले माफिया-राजनेता अतीक अहमद के मामलों में 11 जजों ने खुद को अलग किया था।
साल 2018 में हाईकोर्ट ने चतुर्वेदी के सेवा मामले की सुनवाई नैनीताल स्थित कैट बेंच में करने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इसे बरकरार रखा, लेकिन 2023 में इसे बड़ी पीठ के पास भेजने का निर्णय लिया गया। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और यूयू ललित समेत कई जज भी सुनवाई से खुद को अलग कर चुके हैं।
Read More : Vivo V60e Smartphone : मीडियाटेक डाइमेंसिटी 7300 और 50MP AI सेल्फी कैमरा के साथ लॉन्चिंग तैयार
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह केस प्रशासनिक मामलों और न्यायिक प्रक्रिया के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण है।







