ICC Masterstroke Against PAK : नई दिल्ली (10 फरवरी 2026): भारत-पाकिस्तान मुकाबले को लेकर पिछले कई दिनों से चल रहा सस्पेंस अब खत्म हो गया है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB), जिसने पहले सुरक्षा और स्वाभिमान का हवाला देकर टी20 विश्व कप 2026 के बायकॉट की धमकी दी थी, अब बिना किसी शर्त के खेलने के लिए राजी हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पीसीबी की कूटनीतिक हार और आईसीसी (ICC) के कड़े रुख का नतीजा है।
बांग्लादेश का इस्तेमाल और धोखा
इस पूरे विवाद में पाकिस्तान ने अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए बांग्लादेश को मोहरा बनाया। पीसीबी ने कोशिश की थी कि विवाद को ‘क्षेत्रीय चिंता’ का रूप दिया जाए, लेकिन जैसे ही आईसीसी ने सख्त तेवर दिखाए, पाकिस्तान ने बांग्लादेश को अकेला छोड़ दिया। यह ‘डबल गेम’ अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की साख को नुकसान पहुँचा रहा है।
क्यों झुका पाकिस्तान?
-
आर्थिक दबाव: भारत-पाक मैच आईसीसी के राजस्व का सबसे बड़ा जरिया है। मैच न खेलने की स्थिति में पाकिस्तान पर भारी आर्थिक जुर्माना और बैन का खतरा मंडरा रहा था।
-
आईसीसी की दो टूक: आईसीसी ने स्पष्ट कर दिया था कि टूर्नामेंट के ढांचे में कोई बदलाव नहीं होगा और न ही भारत पर कोई दबाव डाला जाएगा।
-
विश्वसनीयता का संकट: बार-बार बयान बदलकर पीसीबी ने खुद को एक अस्थिर बोर्ड के रूप में पेश किया है।
नतीजा: खोखली साबित हुई धमकी
अंततः वही हुआ जिसकी उम्मीद क्रिकेट पंडित कर रहे थे। पाकिस्तान की ‘बायकॉट’ की धमकी महज एक सौदेबाजी का जरिया थी, जो आईसीसी के ‘मास्टरस्ट्रोक’ के आगे फेल हो गई। अब मैच तय कार्यक्रम के अनुसार खेला जाएगा, लेकिन इस पूरे प्रकरण ने पाकिस्तान क्रिकेट के दोहरे चरित्र को बेनकाब कर दिया है।













