Health Workers Strike : डिंडौरी। जिला मुख्यालय स्थित सरकारी अस्पताल और आकस्मिक चिकित्सा इकाई में शुक्रवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब स्टाफ नर्सों और सपोर्ट स्टाफ ने अचानक एक दिवसीय हड़ताल का नोटिस चस्पा कर दिया। इस सूचना के फैलते ही अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गईं और वार्डों में भर्ती मरीजों व उनके परिजनों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया। करीब 20 मिनट तक अस्पताल में कामकाज पूरी तरह ठप रहा, जिससे दूर-दराज से आए मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
जैसे ही हड़ताल की जानकारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. मनोज पांडे को मिली, वे तुरंत हरकत में आए। उन्होंने हड़ताल की तैयारी कर रहे स्टाफ को दो-टूक शब्दों में चेतावनी दी कि वर्तमान में स्वास्थ्य सेवाओं पर ‘एस्मा’ (अत्यावश्यक सेवा अनुरक्षण कानून) लागू है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कानून के प्रभावी होने के कारण कोई भी कर्मचारी हड़ताल पर नहीं जा सकता और ऐसा करना सीधे तौर पर सेवा नियमों का उल्लंघन व दंडनीय अपराध माना जाएगा।
प्रशासन की इस सख्त चेतावनी और नौकरी पर आने वाले संभावित खतरे को देखते हुए हड़ताली कर्मचारी बैकफुट पर आ गए। कानूनी कार्रवाई के डर से महज 20 मिनट के भीतर ही सभी नर्सें और सपोर्ट स्टाफ अपना विरोध प्रदर्शन खत्म कर अपने-अपने कार्यस्थलों पर लौट आए। इसके बाद अस्पताल की ओपीडी और इमरजेंसी सेवाएं फिर से सामान्य रूप से संचालित होने लगीं।
सीएमएचओ डॉ. मनोज पांडे ने बताया कि मरीजों के स्वास्थ्य के साथ किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्टाफ को निर्देश दिए कि यदि उनकी कोई जायज मांगें हैं, तो उन्हें उचित माध्यम से प्रशासन के सामने रखें, लेकिन हड़ताल जैसा कदम उठाकर मरीजों की जान जोखिम में डालना कतई स्वीकार्य नहीं है। फिलहाल अस्पताल में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और कामकाज सुचारू रूप से जारी है।













