Health: सुबह की शुरुआत नीम की दातुन से करने की परंपरा आज भी कई घरों में देखने को मिलती है। खासकर गांवों और छोटे शहरों में लोग ताजी नीम की टहनी लेकर उससे दांत और मसूड़े साफ करते हैं। दातुन का इस्तेमाल भले ही पुराना तरीका हो, लेकिन आज भी कई लोग इसे टूथब्रश का देसी विकल्प मानते हैं। हालांकि, इसका इस्तेमाल करते समय यह समझना जरूरी है कि इससे मुंह की सफाई में कितनी मदद मिल सकती है और किन स्थितियों में सिर्फ दातुन पर निर्भर रहना ठीक नहीं है।
क्या हैं फायदे?
नीम की टहनी से बने मुलायम रेशे दांतों के आसपास की सफाई में मदद कर सकते हैं। इसे चबाने से मुंह में लार भी बढ़ सकती है और दातुन के बाद कुछ लोगों को मुंह में ताजगी महसूस होती है। नीम में कुछ ऐसे प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं जिनमें रोगाणुरोधी गुण होते हैं। हालांकि, इससे यह साबित नहीं होता कि नीम की दातुन कैविटी, टार्टर या मसूड़ों की बीमारी का इलाज कर सकती है। सही तरीके से इस्तेमाल करने पर इससे दांतों पर मौजूद कुछ खाने के अवशेष और सतही गंदगी हटाने में मदद मिल सकती है।
इन गलतियों से बचें
दातुन को दांतों पर बहुत जोर से रगड़ना नुकसान पहुंचा सकता है। इससे मसूड़ों में चोट या जलन और दांतों की सतह पर अनावश्यक घिसाव हो सकता है। गंदी, बासी या फफूंद लगी टहनी का इस्तेमाल बिल्कुल न करें। हर तरह की पेड़ की टहनी को दातुन समझकर इस्तेमाल करना भी सही नहीं है।
अगर दातुन करते समय मसूड़ों से खून आता है, दर्द या सूजन रहती है या सांसों की बदबू लगातार बनी रहती है, तो इसे केवल दातुन से ठीक करने की कोशिश न करें। ऐसी समस्या में दंत चिकित्सक से जांच कराना बेहतर है।
दातुन का सही तरीका
हमेशा साफ और ताजी नीम की टहनी लें। उसे धोकर एक सिरा हल्का चबाएं और रेशे मुलायम होने के बाद बिना ज्यादा दबाव के दांत साफ करें। मसूड़ों पर भी हल्का हाथ रखें। इस्तेमाल की हुई दातुन को दोबारा रखने के बजाय फेंक दें और अगली बार नई टहनी लें।
क्या ब्रश की जगह ले सकती है?
नीम की दातुन से सफाई में मदद मिल सकती है, लेकिन इसे फ्लोराइड वाले टूथपेस्ट से दिन में दो बार ब्रश करने का निश्चित विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। दांतों में कैविटी से बचाव के लिए फ्लोराइड टूथपेस्ट की भूमिका अच्छी तरह स्थापित है।






