Saturday, August 15, 2026
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Haridwar : मनसा देवी मंदिर में भगदड़ से 6 श्रद्धालुओं की मौत, CM धामी ने किया मुआवजे का ऐलान, मजिस्ट्रियल जांच शुरू

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Haridwar : हरिद्वार। श्रावण मास के पहले रविवार को हरिद्वार के प्रसिद्ध मनसा देवी मंदिर में हुई भगदड़ से प्रदेश भर में शोक की लहर फैल गई। इस भीषण हादसे में 6 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 30 से अधिक लोग घायल हो गए हैं। मंदिर परिसर में अचानक मची भगदड़ के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 2-2 लाख रुपये मुआवजे का ऐलान किया है और मजिस्ट्रियल जांच के आदेश भी दे दिए हैं।

क्या हुआ था हादसे के वक्त?
रविवार सुबह कांवड़ यात्रा और श्रावण रविवार के कारण मंदिर में भारी भीड़ उमड़ी थी। सुबह 9 बजे के करीब जैसे ही श्रद्धालु ट्रॉली मार्ग से मंदिर की ओर बढ़ रहे थे, किसी अफवाह के चलते अचानक भगदड़ मच गई। इस अफरातफरी में कई लोग गिर पड़े और नीचे दबने से उनकी मौत हो गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, भीड़ पर नियंत्रण के पर्याप्त इंतज़ाम नहीं थे। लोगों में घबराहट और शोरगुल के बीच घायल श्रद्धालुओं को स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया। मृतकों में अधिकतर बुजुर्ग और महिलाएं शामिल हैं।

सीएम धामी का बयान और राहत की घोषणा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर घटना पर शोक व्यक्त करते हुए लिखा:

“हरिद्वार स्थित मनसा देवी मंदिर मार्ग में भगदड़ मचने का अत्यंत दुखद समाचार प्राप्त हुआ है। SDRF, स्थानीय पुलिस और अन्य बचाव दल राहत कार्यों में लगे हैं। मैं खुद स्थिति पर नजर रखे हुए हूं।”

उन्होंने कहा:

“सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख और घायलों को ₹50 हजार की सहायता राशि दी जाएगी। साथ ही मजिस्ट्रियल जांच के निर्देश दे दिए गए हैं ताकि घटना की वास्तविक वजह सामने आ सके।”

प्रशासन और पुलिस पर सवाल
हर साल सावन के महीने में लाखों श्रद्धालु मनसा देवी मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं। इसके बावजूद भीड़ नियंत्रण, ट्रॉली संचालन, अफवाहों से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार नहीं दिखा। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि सुरक्षा उपायों, CCTV निगरानी और राहत तंत्र को समय रहते सक्रिय क्यों नहीं किया गया?

भगदड़ क्यों फैली – जांच में सामने आ सकते हैं ये कारण:

  • मंदिर ट्रॉली के पास ज्यादा भीड़ और कम स्पेस
  • अफवाह कि ट्रॉली फंस गई है या फट गई है
  • प्रशासनिक लापरवाही, गार्ड्स की अनुपस्थिति
  • श्रद्धालुओं के बीच भगदड़ का डर और भागमभाग
  • मंदिर मार्ग पर बाजार और अस्थायी स्टॉल्स की भीड़

पीड़ितों के लिए तत्काल राहत और मेडिकल सहायता
घायलों को तत्काल हरिद्वार जिला अस्पताल, ऋषिकेश AIIMS और देहरादून में रेफर किया गया है। एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीम ने मौके पर पहुंचकर घायलों को निकाला।

धार्मिक स्थलों पर भीड़ प्रबंधन फिर सवालों के घेरे में
यह हादसा एक बार फिर दिखाता है कि भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भीड़ नियंत्रण, अफवाह प्रबंधन, और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली कितनी कमजोर है। ऐसी घटनाएं 2013 इलाहाबाद कुंभ भगदड़, 2022 जम्मू माता वैष्णो देवी हादसा, और अब 2025 हरिद्वार भगदड़ के रूप में लगातार सामने आ रही हैं।

 

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