ग्वालियर/गुना: मध्य प्रदेश के गुना जिले में 14 वर्षीय अभ्युदय जैन की मौत से जुड़े मामले में उसकी मां अलका जैन को ग्वालियर हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर और निचली अदालत द्वारा लिए गए संज्ञान को निरस्त कर दिया है। अदालत ने उन्हें कानूनी रूप से निर्दोष घोषित किया।
मामले की पृष्ठभूमि
14 फरवरी 2025 को अभ्युदय जैन का शव घर के बाथरूम में मिला था। इसके बाद कोतवाली थाना गुना में मामला दर्ज हुआ। प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को देखते हुए मां अलका जैन को आरोपी बनाकर गिरफ्तार किया था। बाद में उन्हें जमानत मिल गई।
एसआईटी जांच और रिपोर्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया। जांच के दौरान गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल से विशेषज्ञ राय ली गई। मेडिकल रिपोर्ट में मौत का कारण फांसी बताया गया। इसके बाद एसआईटी ने अलका जैन को निर्दोष मानते हुए क्लोजर रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की।
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निचली अदालत का आदेश और चुनौती
सीजेएम गुना कोर्ट ने एसआईटी की रिपोर्ट स्वीकार नहीं की और हत्या व साक्ष्य छिपाने की धाराओं में संज्ञान लेकर मुकदमा चलाने का आदेश दिया। इस आदेश को अलका जैन ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
हाईकोर्ट का निर्णय
सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जब जांच एजेंसी ने अंतिम रिपोर्ट में आरोपी को दोषमुक्त बताया है, तो केवल अनुमानों के आधार पर मुकदमा जारी रखना विधि के सिद्धांतों के खिलाफ है। अदालत ने सीजेएम का आदेश रद्द करते हुए BNS की संबंधित धाराओं के तहत लिया गया संज्ञान निरस्त कर दिया और सभी कार्यवाहियां समाप्त करने का निर्देश दिया।इस फैसले के साथ अलका जैन को कानूनी राहत मिल गई है और लंबे समय से चल रहा विवाद समाप्त हो गया है।











