Gold Price : सोने की कीमत में तेजी… क्‍या शेयर बाजार पर मंडरा रहा है खतरा? ‘निक्सन शॉक’ जैसे हालात की आशंका या महज एक संयोग?

Gold Price : नई दिल्ली: हाल के दिनों में सोने की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है, जिसके बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्‍या शेयर बाजार पर कोई बड़ा जोखिम मंडरा रहा है? इतिहास गवाह है कि कई बार जब सोने की कीमतों में उछाल आया, तो शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिली. ऐसे में कुछ विश्लेषक 1971 के ‘निक्सन शॉक’ की याद दिला रहे हैं, जब सोने की कीमतें दशकों के स्थिर स्तर से अचानक बढ़ने लगी थीं और इसके साथ ही वैश्विक आर्थिक अस्थिरता ने जोर पकड़ा था.

Gold Price : 1971 में अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने डॉलर को सोने से अलग कर दिया था, जिससे “ब्रेटन वुड्स सिस्टम” खत्म हो गया. इसके बाद सोने की कीमतें 35 डॉलर प्रति औंस से बढ़ती चली गईं. महंगाई, मुद्रा अवमूल्यन और भू-राजनीतिक तनाव के बीच अगले दो दशकों तक सोना निवेशकों की पहली पसंद बना रहा, जबकि शेयर बाजारों में कई उतार-चढ़ाव आए.

Gold Price : अब जब वैश्विक स्तर पर महंगाई, ब्याज दरों और व्यापारिक तनावों की चर्चा हो रही है, तो कुछ विशेषज्ञ इसे ‘नया निक्सन शॉक’ कहने लगे हैं. हालांकि हालिया आंकड़े बताते हैं कि पिछले कुछ दिनों से सोने के दामों में हल्की गिरावट भी आई है, जिससे यह साफ नहीं है कि आगे क्या होगा.

Gold Price : इस बीच ICICI सिक्योरिटीज जैसी ब्रोकरेज फर्मों का कहना है कि इस बार मामला कुछ अलग है. उनका मानना है कि सोने की कीमतों में तेजी और शेयर बाजार के बीच सीधा रिश्ता नहीं है. पहले जैसा पैटर्न अब नहीं दिखता. आज के समय में कई बार सोना और शेयर दोनों ही एक साथ ऊपर जाते देखे गए हैं. उदाहरण के तौर पर, 2010 में वैश्विक संकट के बाद जब केंद्रीय बैंकों ने मौद्रिक नीतियों में ढील दी, तब सोने और शेयर बाजार दोनों में तेजी आई थी.

Gold Price : ब्रोकरेज फर्मों का यह भी कहना है कि वर्तमान में सोने की मांग ज्यादातर केंद्रीय बैंकों और अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितताओं की वजह से बढ़ रही है, न कि शेयर बाजार की कमजोरी के कारण. इसलिए अगर किसी दिन सोने की कीमत बढ़े और शेयर बाजार गिरे, तो इसे महज एक संयोग माना जाना चाहिए.

Gold Price : भले ही सोने की कीमतों में उछाल से कुछ लोगों को ‘निक्सन शॉक’ जैसे हालात की याद आ रही हो, लेकिन मौजूदा हालात अलग हैं. आज के वैश्विक आर्थिक ढांचे, निवेश प्रवृत्तियों और नीतिगत हस्तक्षेप पहले से कहीं ज्यादा जटिल हैं. सोने की कीमतों में तेजी को शेयर बाजार की गिरावट का संकेत मानना फिलहाल अतिशयोक्ति हो सकता है. निवेशकों को डर के बजाय आंकड़ों और विवेक से फैसला लेना ज्यादा जरूरी है.

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