Gadha mela : सतना। दीपावली के बाद चित्रकूट में परंपरा, संस्कृति और व्यापार का अनोखा संगम लेकर तीन दिवसीय गधा मेला शुरू हुआ। इस बार भी फिल्मी नाम वाले गधे जैसे ‘शाहरुख’, ‘सलमान’ और ‘धोनी’ मेले के आकर्षण का केंद्र बने रहे। इनमें से ‘शाहरुख’ पर सबसे ऊंची बोली 1.05 लाख रुपए की लगी। वहीं महिला व्यापारियों की बढ़ती भागीदारी ने इस मेले की रौनक को और भी बढ़ा दिया।

Gadha mela : मेले में इस बार महिलाओं की उपस्थिति विशेष रूप से चर्चा में रही। घूंघट ओढ़े महिला व्यापारियों ने बोली लगाने में पुरुषों को पीछे छोड़ दिया। इनमें से एक महिला ने अकेले 15 जानवर खरीदकर सबको चौंका दिया। खरीदे गए ये जानवर अब ईंट-भट्टों, निर्माण कार्यों और परिवहन के काम में इस्तेमाल किए जाएंगे।
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हर साल की तरह इस बार भी फिल्मी नाम वाले गधों ने व्यापारियों का ध्यान खींचा। ‘शाहरुख’ के अलावा ‘सलमान’, ‘बसंती’ और ‘धोनी’ नाम के गधों पर भी अच्छी बोली लगी। पिछले साल ‘लॉरेंस’ नाम के खच्चर ने 1.25 लाख रुपए की रिकॉर्ड बोली लगवाई थी। इस बार उम्मीद है कि मेले के अंतिम दिन तक यह रिकॉर्ड टूट सकता है।
इतिहासकारों के अनुसार, यह मेला सन् 1670 में मुगल बादशाह औरंगजेब के शासनकाल में शुरू हुआ था। कहा जाता है कि चित्रकूट पर आक्रमण के दौरान उसकी सेना के घोड़े बीमार पड़ गए थे। तब बालाजी मंदिर के निर्माण और सामान ढुलाई के लिए गधों की खरीद का आदेश दिया गया, और तभी से यह परंपरा शुरू हुई।
Gadha mela : इस बार के मेले में देश-विदेश से 300 से अधिक गधे, खच्चर और घोड़ियां शामिल हुए। व्यापारी मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, नेपाल और अफगानिस्तान तक से पहुंचे। पहले ही दिन से खरीद-फरोख्त का माहौल उत्साहजनक रहा। व्यापारियों के साथ-साथ स्थानीय लोग और पर्यटक भी बड़ी संख्या में मेले का आनंद लेने पहुंचे।
चित्रकूट का यह गधा मेला अब देश का दूसरा सबसे बड़ा पशु मेला बनकर उभरा है। यह मेला केवल व्यापार का केंद्र नहीं, बल्कि लोक संस्कृति और परंपरा की झलक भी प्रस्तुत करता है। फिल्मी नाम वाले जानवरों और महिला व्यापारियों की सक्रिय भागीदारी ने इस आयोजन को इस बार और भी खास बना दिया है।








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