निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : वाहनों में पेट्रोल या डीजल भरवाते समय अधिकतर लोग टैंक को पूरी तरह फुल कराने पर जोर देते हैं, लेकिन यह आदत कई बार नुकसानदायक साबित हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, फ्यूल टैंक को उसकी तय क्षमता से ज्यादा भरवाना न केवल गाड़ी की परफॉर्मेंस को प्रभावित करता है, बल्कि यह सुरक्षा के लिहाज से भी जोखिम बढ़ा देता है।
फ्यूल टैंक में खाली जगह क्यों जरूरी?
ऑटोमोबाइल कंपनियां हर वाहन के फ्यूल टैंक की एक निश्चित क्षमता तय करती हैं। हालांकि, टैंक के अंदर थोड़ा अतिरिक्त स्पेस छोड़ा जाता है, जो फ्यूल के फैलाव (एक्सपैंशन) और वेंटिलेशन के लिए जरूरी होता है। अगर टैंक को पूरी तरह भर दिया जाए, तो यह स्पेस खत्म हो जाता है।
तापमान बढ़ने से बढ़ता है दबाव
पेट्रोल पंप के टैंकों में रखा ईंधन ठंडा होता है, लेकिन बाहर आने पर उसका तापमान बढ़ जाता है। तापमान बढ़ने से फ्यूल फैलता है और टैंक के अंदर दबाव बढ़ जाता है। ऐसे में ओवरफिलिंग की स्थिति में लीकेज का खतरा बढ़ सकता है।
इंजन और परफॉर्मेंस पर असर
फ्यूल टैंक में मौजूद एयर स्पेस पेट्रोल या डीजल की भाप को संतुलित रखने में मदद करता है। जब यह स्पेस खत्म हो जाता है, तो इंजन की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है और गाड़ी का माइलेज भी कम हो सकता है।
सेफ्टी के लिहाज से बड़ा खतरा
खासकर बाइक में, अगर टैंक को पूरा भर दिया जाए और वाहन को साइड स्टैंड पर खड़ा किया जाए, तो फ्यूल बाहर निकल सकता है। पेट्रोल अत्यधिक ज्वलनशील होता है, जिससे आग लगने का खतरा भी बढ़ जाता है।
बढ़ सकता है प्रदूषण
ओवरफिलिंग के कारण फ्यूल की भाप बाहर निकल सकती है, जिससे पर्यावरण प्रदूषण भी बढ़ता है। यह न केवल वाहन के लिए बल्कि वातावरण के लिए भी नुकसानदायक है।
क्या है सही तरीका?
विशेषज्ञों की मानें तो हमेशा वाहन की निर्धारित क्षमता के अनुसार ही फ्यूल भरवाना चाहिए। टैंक को पूरी तरह भरने के बजाय थोड़ा खाली स्थान छोड़ना सुरक्षित और बेहतर विकल्प है।इस छोटी सी सावधानी से आप न सिर्फ अपनी गाड़ी की उम्र बढ़ा सकते हैं, बल्कि संभावित हादसों से भी बच सकते हैं।











