four lane road : सिंगरौली। मुख्यमंत्री द्वारा 4 जुलाई 2025 को सरई में की गई परसौना से माड़ा और परसौना से बरगवां तक फोरलेन सड़क निर्माण की घोषणा चार महीने बाद भी धरातल पर नहीं उतर सकी है। प्रशासनिक लापरवाही के चलते यह महत्वपूर्ण परियोजना केवल कागजों तक ही सीमित है। अभी तक न तो सड़क का सर्वे पूरा हुआ है, न ही डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) तैयार की गई है और न ही ड्राइंग डिजाइन बनाकर भोपाल भेजी गई है।
प्रशासनिक सुस्ती से अटका काम :
जिला स्तर पर इस परियोजना को लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है, जिससे मुख्यमंत्री की घोषणा महज एक औपचारिकता बनकर रह गई है। स्थानीय नागरिक और जनप्रतिनिधि इस बात से खासे नाराज हैं कि चार महीने बीत जाने के बाद भी काम प्रारंभिक स्तर से आगे नहीं बढ़ा है। लोगों का कहना है कि यदि काम की यही धीमी गति रही तो सड़क का निर्माण शुरू होना आने वाले वर्षों में भी मुश्किल है।
four lane road : रोजाना गुजरते हैं 5 से 6 हजार वाहन:
परसौना–बरगवां और परसौना–माड़ा दोनों ही मार्ग सिंगरौली जिले के सबसे व्यस्ततम मार्ग हैं, जो औद्योगिक गतिविधियों की रीढ़ माने जाते हैं। इन सड़कों से रोजाना कोयला, राखड़ और अन्य खनिजों का बड़े पैमाने पर परिवहन होता है। अनुमान है कि प्रतिदिन 5 से 6 हजार वाहन इन मार्गों से गुजरते हैं। सड़क की चौड़ाई कम होने के कारण इन मार्गों पर आए दिन गंभीर सड़क हादसे होते रहते हैं, जिनमें कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
four lane road : भूमि अधिग्रहण की बाधा नहीं, फिर भी विलंब:
जानकारों का कहना है कि दोनों मार्गों की अधिकांश भूमि सरकारी होने के कारण भूमि अधिग्रहण में कोई बड़ी बाधा नहीं है। लगभग 300 से 400 करोड़ रुपये की इस परियोजना को डीएमएफ (जिला खनिज फाउंडेशन) फंड के माध्यम से भी पूरा किया जा सकता है, जिससे राज्य पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। इसके बावजूद परियोजना में देरी होना प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी को दर्शाता है।
four lane road : देवसर विधायक बोले – जल्द करेंगे चर्चा:
देवसर विधायक राजेंद्र मेश्राम ने कहा, “मुख्यमंत्री जी की घोषणा को मूर्त रूप देने के प्रयास जारी हैं। इन मार्गों का चौड़ीकरण अति आवश्यक है, ताकि आम जनता को सुरक्षित और सुगम आवागमन मिल सके। मैं कुछ दिनों में भोपाल जाकर मुख्यमंत्री से चर्चा कर स्वीकृति प्राप्त करने का प्रयास करूंगा।”
स्थानीय जनता ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस परियोजना को कागजों से बाहर निकालकर तुरंत डीपीआर तैयार कर शासन को भेजी जाए। लोगों को आशंका है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह परियोजना भी कई अन्य घोषणाओं की तरह ठंडे बस्ते में चली जाएगी।













