E20 petrol : नई दिल्ली। देशभर में लागू किए जा रहे 20% एथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल (E20) पर अब कानूनी पेंच फंस गया है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक जनहित याचिका में मांग की गई है कि जब तक उपभोक्ताओं को **एथेनॉल-मुक्त पेट्रोल का विकल्प नहीं दिया जाता, तब तक इसे अनिवार्य न किया जाए।
E20 petrol : अधिवक्ता अक्षय मल्होत्रा की ओर से दायर याचिका के मुताबिक, अप्रैल 2023 से पहले बने वाहन और यहां तक कि BS-VI मॉडल भी E20 पेट्रोल के लिए पूरी तरह उपयुक्त नहीं हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, एथेनॉल का अधिक मिश्रण इंजनों में जंग, ईंधन दक्षता में कमी और वाहनों की समय से पहले खराबी का कारण बन सकता है।
E20 petrol : याचिका में बड़ा आरोप यह भी लगाया गया है कि अगर किसी वाहन को E20 पेट्रोल से नुकसान होता है, तो न निर्माता कंपनी और न ही बीमा कंपनियां उसका मुआवजा देंगी। इसका सीधा मतलब यह है कि उपभोक्ता को पूरा खर्च अपनी जेब से उठाना पड़ेगा।
E20 petrol : तुलना में, अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में उपभोक्ताओं को एथेनॉल-मुक्त और अलग-अलग मिश्रण वाले ईंधन का विकल्प मिलता है, साथ ही स्पष्ट लेबलिंग भी होती है। लेकिन भारत में बिना किसी लेबलिंग या सूचना के केवल मिश्रित ईंधन ही उपलब्ध कराया जा रहा है। अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं, क्योंकि इसका असर देशभर के वाहन मालिकों पर पड़ेगा।
E20 petrol : याचिका में सुप्रीम कोर्ट से चार अहम निर्देश मांगे गए है
1. सभी पेट्रोल पंपों पर एथेनॉल-मुक्त पेट्रोल उपलब्ध कराया जाए।
2. पेट्रोल पर एथेनॉल की मात्रा का स्पष्ट लेबलिंग अनिवार्य की जाए।
3. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम का सख्ती से पालन कराया जाए।
4. E20 पेट्रोल के प्रभाव का राष्ट्रव्यापी अध्ययन कराया जाए।











