Raipur GST Scam: रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कर चोरों, फर्जी बिलिंग और सरकारी राजस्व को क्षति पहुंचाने वाले संगठित सिंडिकेट के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों ने अपनी कार्रवाई को और अधिक आक्रामक कर दिया है। इसी कड़ी में महानिदेशालय जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI) की रायपुर क्षेत्रीय इकाई ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए ₹6.93 करोड़ के इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) घोटाले के मास्टरमाइंड को गिरफ्तार कर लिया है। DGGI के अधिकारियों ने एडिशनल डायरेक्टर जनरल सुजीत मलिक के नेतृत्व में जाल बिछाकर मेसर्स ओम किरण इस्पात उद्योग के पार्टनर हरीश वाधवानी को हिरासत में लिया है।
5 महीने से चल रहा था फरार, सुप्रीम कोर्ट तक ने नहीं दी राहत
इस मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब जांच में पता चला कि आरोपी हरीश वाधवानी पिछले लगभग पाँच महीने से पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों को चकमा देकर फरार चल रहा था। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) के लिए निचली अदालतों से लेकर देश के विभिन्न न्यायालयों का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए अंततः माननीय सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने भी उसकी अग्रिम जमानत याचिका को सिरे से अस्वीकार कर दिया। शीर्ष अदालत से राहत न मिलने के बाद DGGI के अधिकारियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उसे दबोच लिया।
सीजीएसटी अधिनियम की धारा 69(1) के तहत हुई कार्रवाई
यह हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) अधिनियम, 2017 की धारा 69(1) के अंतर्गत की गई है। आरोपी हरीश वाधवानी पर वास्तविक रूप से किसी भी प्रकार के माल या सेवा की प्राप्ति (भौतिक डिलीवरी) किए बिना, केवल कागजों पर बोगस बिलों की हेराफेरी कर लगभग ₹6.93 करोड़ मूल्य के इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का अवैध लाभ उठाने और वित्तीय प्रणाली में उसका उपयोग करने का गंभीर और प्रत्यक्ष आरोप है।
बोगस और गैर-संचालित फर्मों का फैला रखा था जाल
DGGI द्वारा विकसित खुफिया जानकारी और जांच के दौरान यह सामने आया कि मेसर्स ओम किरण इस्पात उद्योग (GSTIN: 22AABFO1161B1Z5) बाजार में अस्तित्वहीन, फर्जी और गैर-संचालित (Non-operational) फर्मों के एक व्यापक, बहु-स्तरीय (Multi-layered) नेटवर्क के माध्यम से अवैध आईटीसी प्राप्त करने के संगठित रैकेट में संलिप्त था।
GSTR-2A डेटा की बारीक स्क्रूटनी से हुआ भंडाफोड़
जांच एजेंसी ने जब उक्त करदाता के GSTR-2A एवं अन्य वित्तीय अभिलेखों की तकनीकी जांच की, तो परतें दर परत सच सामने आने लगा। स्क्रूटनी में पाया गया कि आरोपी द्वारा बड़ी मात्रा में फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट ऐसे जीएसटी पंजीकरणों (GST Registrations) से प्राप्त किया जा रहा था, जिन्हें विभाग द्वारा काफी पहले ही या तो निलंबित (Suspend) किया जा चुका था या पूरी तरह से निरस्त (Cancel) कर दिया गया था।
कई और कप्तानों पर गिरेगी गाज, धन के प्रवाह की जांच जारी
एडिशनल डायरेक्टर जनरल सुजीत मालिक के मार्गदर्शन में DGGI की टीम अब इस रैकेट से जुड़े अन्य सहयोगियों और फर्जी फर्मों के संचालकों की तलाश में जुटी हुई है। विभाग का मानना है कि हरीश वाधवानी से कड़ाई से पूछताछ के बाद छत्तीसगढ़ और पड़ोसी राज्यों में फैले फर्जी बिलिंग सिंडिकेट के कई और बड़े नामों का खुलासा हो सकता है।









